11 अप्रैल: महान समाजसेवी ज्योतिबा फुले की आज जयंती, देश से छुआछूत खत्म करने, समाज को सशक्त बनाने में निभाई अहम भूमिका

आज 11 अप्रैल 2026 है। आज ज्योतिबा फुले की जयंती है। उन्होंने देश से छुआछूत खत्म करने और समाज को सशक्त बनाने में अहम भूमिका निभाई।

महान क्रांतिकारी, भारतीय विचारक, समाजसेवी, लेखक एवं दार्शनिक थे‌ ज्योतिबा फुले

महात्मा ज्योतिबा फुले की जयंती हर वर्ष 11 अप्रैल को मनायी जाती है। महात्मा ज्योतिबा फुले का जन्म 11 अप्रैल 1827 को पुणे में हुआ था। वे महान क्रांतिकारी, भारतीय विचारक, समाजसेवी, लेखक एवं दार्शनिक थे। 1840 में ज्योतिबा का विवाह सावित्रीबाई से हुआ था। समाज के वंचित व पीड़ित तबके और महिलाओं के उत्थान के लिए ज्योतिबा फुले व उनकी पत्नी सावित्रीबाई फुले ने अपना पूरा जीवन न्योछावर कर दिया। उन्होंने महाराष्ट्र में सर्वप्रथम महिला शिक्षा तथा अछूतोद्धार का काम आरंभ किया था। उन्होंने पुणे में लड़कियों के लिए भारत की पहला विद्यालय खोला। उनका यह भाव देखकर 1888 में उन्हें ‘महात्मा’ की उपाधि दी गई थी। 63 वर्षों तक उन्होंने समाज में सकारात्मक परिवर्तन के लिए लगातार आवाज उठायी। 28 नवंबर, 1890 को महात्मा फुले का निधन हो गया।

भारत में सामाजिक सुधार आंदोलन में निभाई अहम भूमिका

महात्मा ज्योतिबा को महाराष्ट्र और भारत में सामाजिक सुधार आंदोलन में एक सबसे महत्त्वपूर्ण व्यक्ति के रूप में माना जाता है। उनको महिलाओं और दलित जातियों को शिक्षित करने के प्रयासों के लिए जाना जाता है। ज्योतिराव, जो बाद में ज्योतिबा के नाम से जाने गए सावित्रीबाई के संरक्षक, गुरु और समर्थक थे।