आज 29 जुलाई 2025 को ‘अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस’ है। वैश्विक स्तर पर बाघों के संरक्षण व उनकी लुप्तप्राय हो रही प्रजाति को बचाने के लिए जागरूकता फैलाना ही इस दिवस को मनाने का प्रमुख उद्देश्य है।
जानें इनका महत्व
बाघों की घटती संख्या के कारणों को जानने के साथ ही उनके संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करने के मकसद से मनाया जाता है यह दिन। बाघ हमारे पारिस्थितिकी तंत्र को स्वस्थ रखने और उसकी विविधता को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। अगर बाघ नहीं बचेंगे, तो इससे पूरा पारिस्थितिक तंत्र बुरी तरह से प्रभावित हो सकता है। इसलिए इसका महत्व समझना जरूरी है। भारत सरकार ने साल 1973 में बाघों को संरक्षण प्रदान करने के उद्देश्य से प्रोजेक्ट टाइगर की शुरुआत की थी। इस प्रोजेक्ट के तहत कई सारे टाइगर रिजर्व स्थापित किए गए। कई तरह की नीतियां बनाई गईं, जिससे बाघों का शिकार रोका जा सके, उनकी संख्या बढ़ाने पर काम किया जा सके। जिसकी बदौलत अभी भारत में कुल 54 टाइगर रिजर्व हैं।
भारत में बाघ की प्रजातियां
देश में बाघों की 5 प्रजातियां पाई जाती हैं। ये पांचों हैं साइबेरियन, बंगाल टाइगर, इंडोचाइनीज, मलयन व सुमत्रन। आपकी जानकारी के लिए बता दें बाघ को ”बिग कैट” भी कहा जाता है। इसका वैज्ञानिक नाम पैंथेरा टाइग्रिस है। विश्व में सर्वाधिक बाघ भारत में पाए जाते हैं।