उत्तराखंड: उत्तराखंड की रक्षक मानी जाने वाली मां धारी देवी, अब मंदिर क्षेत्र में मोबाइल फोन पूरी तरह से रहेगा वर्जित

उत्तराखंड से जुड़ी खबर है। हमारे देश में प्राचीन और रहस्यमय मंदिरों की कोई कमी नहीं है। एक ऐसा ही मंदिर उत्तराखंड के श्रीनगर से थोड़ी दूरी पर स्थित है मां धारी देवी का। इसी बीच धारी देवी मंदिर से जुड़ी जरूरी जानकारी सामने आई है।

लिया यह निर्णय

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक र उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले में श्रीनगर और रुद्रप्रयाग के बीच अलकनंदा नदी के तट पर स्थित धारी देवी मंदिर परिसर की व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने और श्रद्धालुओं की सुविधा बढ़ाने के उद्देश्य से नगर निगम द्वारा मंदिर समिति के साथ कुछ दिनों पहले महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की। जिसमें तय किया गया कि मंदिर परिसर की पवित्रता और अनुशासन बनाए रखने के लिए मंदिर क्षेत्र में मोबाइल फोन पूरी तरह से वर्जित रहेगा। साथ ही श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए नगर निगम द्वारा मंदिर परिसर में सामान रखने हेतु लॉकर की व्यवस्था की जाएगी, जिससे दर्शन के दौरान लोगों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
इसके अलावा मंदिर में आने और जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए सिंगल विंडो सिस्टम लागू करने पर सहमति बनी है।

जानें पौराणिक कथा

धारी देवी मंदिर उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले में श्रीनगर और रुद्रप्रयाग के बीच अलकनंदा नदी के तट पर स्थित एक अत्यंत प्राचीन और सिद्ध शक्तिपीठ है। यह मां काली को समर्पित है, जिन्हें चार धाम (विशेषकर बद्रीनाथ) की रक्षक और उत्तराखंड की संरक्षक देवी माना जाता है। एक पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार भीषण बाढ़ से मंदिर बह गया था। साथ ही साथ उसमें मौजूद माता की मूर्ति भी बह गई और वह धारो गांव के पास एक चट्टान से टकराकर रुक गई। कहते हैं कि उस मूर्ति से एक ईश्वरीय आवाज निकली, जिसने गांव वालों को उस जगह पर मूर्ति स्थापित करने का निर्देश दिया। इसके बाद गांव वालों ने मिलकर वहां माता का मंदिर बना दिया। पहले मंदिर अलकनंदा नदी के किनारे पर बसा था परन्तु श्रीनगर डैम बनने के बाद मंदिर को उसके मूल स्थान से विस्थापित किया गया जिसके बाद माता धारी देवी ने स्थानीय लोगों पर प्रकोप करना प्रारम्भ कर दिया, जिसके फलस्वरूप मंदिर को पुनः उसी स्थान (अलकनंदा नदी के किनारे) जो कि अब जलमग्न हो चूका था वही पर बड़े-बड़े स्तम्भ के सहारे माता के मंदिर को जमीन से स्तम्भ की मदद हवा में उठाया गया पुजारियों की मानें तो मंदिर में मां धारी की प्रतिमा द्वापर युग से ही स्थापित है। हर साल नवरात्रों के अवसर पर धारी देवी की विशेष पूजा की जाती है। देवी काली के आशीर्वाद पाने के लिए दूर और नजदीक के लोग इसके पवित्र दर्शन करने आते रहे हैं।मंदिर के पास एक प्राचीन गुफा भी मौजूद है।