27 अप्रैल: त्रिशूर पुरम उत्सव आज, सबसे भव्य वार्षिक हिंदू मंदिर उत्सव, मंदिरों में देवी-देवताओं का होता है मिलन




आज 27 अप्रैल 2026 है। आज त्रिशूर पुरम उत्सव है। त्रिशूर पूरम केरल के त्रिशूर में वडक्कुननाथन मंदिर में आयोजित होने वाला सबसे भव्य वार्षिक हिंदू मंदिर उत्सव है। यह त्योहार केरल की धर्मनिरपेक्ष परंपरा का प्रतीक है, जिसमें सभी धर्मों के लोग भाग लेते हैं। 


होता है भव्य कार्यक्रम


इसे ‘त्योहारों का त्योहार’ भी कहा जाता है। कोचीन के राजा शक्तन थंपुरन द्वारा 1798 में शुरू किए गए इस उत्सव में सजे-धजे हाथी, पारंपरिक वाद्ययंत्र (मेलम), रंगीन छतरी बदलने की रस्म (कुडामट्टम) और शानदार आतिशबाजी मुख्य आकर्षण हैं। यह हर साल अप्रैल-मई (मलय पंचांग के मेदम महीने) में त्रिशूर शहर के थेक्किनाडु मैदान में आयोजित होता है। उत्सव में त्रिशूर और आसपास के प्रमुख मंदिरों, विशेषकर परामेक्कावु और थिरुवमबाडी भगवती मंदिरों के देवी-देवताओं का मिलन होता है। इस मौके पर बड़ी संख्या में सजे-धजे हाथी भाग लेते हैं, और ‘कुडामट्टम’ के दौरान हाथियों पर रंगीन छतरियां बदली जाती हैं। साथ ही ‘पांचावाद्यम’ और ‘चेन्डा मेलम’ जैसे पारंपरिक वाद्ययंत्रों का अद्भुत प्रदर्शन होता है।