अल्मोड़ा: एसएसजे विवि में तीन दिवसीय प्राकृतिक चिकित्सा कार्यशाला का हुआ आगाज, विद्यार्थियों ने सीखे ‘सूर्य किरण’ और ‘मसाज थेरेपी’ के गुर






अल्मोड़ा: राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (जल शक्ति मंत्रालय, भारत सरकार) और नमामि गंगे (उत्तराखंड) के संयुक्त तत्वावधान में सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय के योग विज्ञान विभाग में तीन दिवसीय ‘प्राकृतिक एवं वैकल्पिक चिकित्सा कार्यशाला’ का भव्य शुभारंभ हुआ।


कार्यशाला का आयोजन


जिसमें योग विभागाध्यक्ष डॉ. नवीन चंद भट्ट के संरक्षण में आयोजित इस कार्यशाला के पहले दिन विद्यार्थियों को प्रकृति के साथ जुड़कर स्वस्थ रहने के प्रयोगात्मक तरीके सिखाए गए। विभागाध्यक्ष डॉ. नवीन चंद भट्ट का वर्चुअल संबोधन रहा। अवकाश पर होने के बावजूद उन्होंने डिजिटल माध्यम से छात्रों को प्रेरित करते हुए कहा कि योग और प्राकृतिक चिकित्सा केवल उपचार की विधियाँ नहीं, बल्कि जीवन को संतुलित और ऊर्जावान बनाने की संपूर्ण जीवनशैली है। आज की भागदौड़ भरी दुनिया में प्रकृति की ओर लौटना ही सच्चे स्वास्थ्य की कुंजी है। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन और मंत्रोच्चारण के साथ हुआ।


तीन सत्रों में प्रशिक्षण


• ​प्रथम सत्र (आकाश तत्व व उपवास): विशेषज्ञ डॉ. गिरीश अधिकारी ने बताया कि कैसे उपवास के जरिए शरीर के विषाक्त तत्वों को बाहर निकालकर असाध्य रोगों को दूर किया जा सकता है।

• ​द्वितीय सत्र (अग्नि तत्व व रंग चिकित्सा): इसमें विद्यार्थियों को सूर्य किरण चिकित्सा का अभ्यास कराया गया। छात्रों ने रंगीन बोतलों के माध्यम से सीखा कि कैसे सूर्य की ऊर्जा को जल और तेल में समाहित कर औषधि बनाई जाती है।

• ​तृतीय सत्र (वायु चिकित्सा व मसाज): इस सत्र में प्राणायाम, प्रातः भ्रमण और मसाज थेरेपी के जरिए पैरालिसिस, अस्थि रोग और जोड़ों के दर्द के निवारण की जानकारी दी गई।


रहें उपस्थित


​कार्यशाला में कमलेश पाठक, अनुराधा धामी, आदित्य बिष्ट, मोहिता पंत, रिया जोशी, पंकज सिंह राठौर, और ज्योति जीना समेत दर्जनों छात्र-छात्राओं ने सक्रिय रूप से भाग लिया।