उत्तराखंड हाई कोर्ट सख्त, पूछा— किस नीति के तहत भारत में रह रहे नेपाली मूल के लोग, कैसे खरीदी जमीन?, सरकार से 3 हफ्ते में मांगा जवाब

नैनीताल: उत्तराखंड हाई कोर्ट ने नेपाली मूल के नागरिकों द्वारा खुद को भारतीय बताकर नैनीताल और उसके आसपास के क्षेत्रों में सरकारी व वन विभाग की भूमि पर अवैध कब्जा किए जाने के मामले में बेहद सख्त रुख अपनाया है।

हाईकोर्ट का फैसला

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक जिस पर मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने इस मामले में दायर जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार से तीखे सवाल पूछे हैं।
हाई कोर्ट ने सरकार से पूछा है कि ये नेपाली मूल के लोग किस नीति और नियमों के तहत भारत में रह रहे हैं और इनकी ओर से भारत में संपत्तियां व भूमि कैसे खरीदी जा रही है? माननीय अदालत ने इस गंभीर विषय पर सरकार को तीन सप्ताह के भीतर विस्तृत जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक बुधवार को मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से कोर्ट में एक शपथपत्र (Affidavit) पेश किया गया। सरकार ने दलील दी कि भारत-नेपाल के बीच हुई 1950 की नियमावली/संधि के तहत भारतीय नागरिक नेपाल में और नेपाली नागरिक भारत में रहने के साथ-साथ रोजगार भी कर सकते हैं। सरकार के इस तर्क पर याचिकाकर्ता के वकील ने कोर्ट के समक्ष स्पष्ट किया कि नियमावली के अनुसार, यदि कोई नेपाली नागरिक भारत में जमीन खरीदता है, तो वह अनिवार्य रूप से भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के माध्यम से ही खरीदी जानी चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने यह भी ध्यान आकर्षित कराया कि भारतीयों को नेपाल में इस तरह की जमीन खरीदने की सुविधाएं नहीं मिली हुई हैं।

जानें पूरा मामला

दरअसल नैनीताल निवासी पवन द्वारा दायर की गई इस जनहित याचिका में आरोप लगाया गया है कि नैनीताल शहर के समीपवर्ती ग्राम सभा खुर्पाताल के तोक खाड़ी (बजून चौराहे के पास) में नेपाली मूल के करीब 25 परिवारों ने सरकारी, वन विभाग और नजूल भूमि पर अवैध कब्जा कर पक्के आवासीय निर्माण कर लिए हैं। इन लोगों ने भारत की नागरिकता हासिल करने के लिए कभी कोई वैधानिक आवेदन नहीं किया और न ही इन्हें भारत की नागरिकता प्राप्त है। साथ ही याचिका में यह बेहद गंभीर आरोप भी लगाया गया है कि इन परिवारों ने बिना नागरिकता के, अवैध तरीके से भारतीय पहचान पत्र (जैसे पहचान पत्र, ड्राइविंग लाइसेंस, स्थाई निवास प्रमाण पत्र, राशन कार्ड, स्वास्थ्य सेवा कार्ड आदि) बनवा लिए हैं। इन जाली या अवैध दस्तावेजों के दम पर न सिर्फ सरकारी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ उठाया जा रहा है, बल्कि अवैध रूप से पानी और बिजली के सरकारी कनेक्शन भी हासिल कर लिए गए हैं।