अल्मोड़ा: अल्मोड़ा के न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने धारा 138, परकाम्य लिखत अधिनियम से जुड़े एक मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए अभियुक्त को दोषी करार दिया है। अदालत ने अभियुक्त महेश कुमार को 6 माह के साधारण कारावास और कुल 2,13,000 रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है।
जानेंक्या है पूरा मामला
परिवादिनी कल्पना वर्मा ने न्यायालय में परिवाद दायर किया था कि उन्होंने वर्ष 2023 में अभियुक्त महेश कुमार को उनके पिता के इलाज के लिए 2,00,000 रुपये उधार दिए थे। इस राशि की एवज में अभियुक्त ने उन्हें 2,00,000 रुपये का एक चेक दिया था। जब परिवादिनी ने यह चेक अपने बैंक में भुगतान के लिए लगाया, तो खाते में धनराशि अपर्याप्त होने के कारण चेक बाउंस हो गया। कानूनी नोटिस भेजने के बावजूद जब अभियुक्त ने पैसे नहीं लौटाए, तो परिवादिनी ने न्यायालय की शरण ली। मुकदमे के दौरान अभियुक्त ने स्वीकार किया कि चेक पर उसके हस्ताक्षर हैं, लेकिन उसने दावा किया कि उसने केवल 1,00,000 रुपये उधार लिए थे, जिसमें से 60,000 रुपये वह वापस कर चुका है। अभियुक्त ने यह भी तर्क दिया कि उसने ब्लैंक चेक सिक्योरिटी के रूप में दिया था, जिसका परिवादिनी ने गलत इस्तेमाल किया।
अदालत का फैसला
दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने और साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद, न्यायिक मजिस्ट्रेट नवल सिंह बिष्ट ने अभियुक्त के तर्कों को खारिज कर दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि अभियुक्त इस बात का कोई पुख्ता प्रमाण नहीं दे पाया कि चेक पर अधिक राशि गलत तरीके से भरी गई थी। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि अभियुक्त महेश कुमार को 6 माह के साधारण कारावास की सजा सुनाई गई है। उस पर 2,13,000 रुपये का अर्थदंड लगाया गया है। जुर्माने की राशि में से 2,10,000 रुपये परिवादिनी को प्रतिकर (मुआवजे) के रूप में दिए जाएंगे। शेष 3,000 रुपये राज्य के खजाने में जमा होंगे।जुर्माना न भरने पर अभियुक्त को 1 माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।