उत्तराखंड: उत्तराखंड के ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। रेल विकास निगम लिमिटेड (RVNL) ने गंगा नदी के ऊपर बने विशालकाय पुल को सफलतापूर्वक लांच (दोनों छोर के पिलर जोड़ना) कर दिया है।
दिया जाएगा अंतिम स्वरूप
जिसके बाद अब इस पुल को अंतिम स्वरूप दिया जाएगा। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यह पूरी परियोजना में गंगा नदी के ऊपर बना इकलौता मुख्य पुल है, जो रेलवे लाइन को टिहरी जिले से पौड़ी जिले तक जोड़ेगा। वर्तमान में सड़क मार्ग से ऋषिकेश से कर्णप्रयाग की यात्रा करने में करीब छह घंटे का समय लगता है, लेकिन इस रेल परियोजना के पूरा होने के बाद यह यात्रा मात्र ढाई घंटे (2.5 घंटे) में पूरी हो जाएगी। परियोजना के तहत आने वाले 19 प्रमुख पुलों में से 8 का काम पूरा हो चुका है। तय समयसीमा के अनुसार दो चरणों में ट्रेनें चलाई जाएंगी:
1. पहला चरण (जून 2028): योगनगरी ऋषिकेश से ब्यासी (27.69 किमी) तक ट्रेन संचालन का लक्ष्य रखा गया है।
2. दूसरा चरण (दिसंबर 2029): ब्यासी से कर्णप्रयाग (92.60 किमी) तक ट्रेनों का संचालन शुरू कर दिया जाएगा।
खास है खासियत
यह 125 मीटर के मुख्य स्पान और 32 मीटर के सहायक स्पान वाला पुल गंगा नदी पर बना एकमात्र रेल पुल है। परियोजना के बाकी पुल गंगा की सहायक नदियों पर बनाए गए हैं। इसके साथ ही स्टेशनों तक सुगम पहुंच के लिए रोड ब्रिज का निर्माण कार्य भी तेजी से किया जा रहा है। 125 किलोमीटर लंबी इस पूरी परियोजना का लगभग 104 किलोमीटर (यानी करीब 83 प्रतिशत हिस्सा) सुरंगों के भीतर से गुजरेगा। इसमें 16 मुख्य सुरंगें, 12 निकास सुरंगें, 19 प्रमुख और 31 छोटे पुल शामिल हैं। इस परियोजना में उत्तराखंड के 5 प्रमुख जिले—देहरादून, टिहरी गढ़वाल, पौड़ी गढ़वाल, रुद्रप्रयाग और चमोली शामिल हैं। इस रेल परियोजना का सबसे बड़ा रेलवे स्टेशन कर्णप्रयाग होगा, जहां 26 लाइनें बिछाई जा रही हैं और इसे एक आधुनिक टर्मिनस के रूप में विकसित किया जा रहा है।