हरेंद्र बिष्ट की रिपोर्ट
थराली/देवाल: रूपकुंड घाटी के ग्रामीणों की आजीविका और रोजगार की उम्मीदों पर एक बार फिर पानी फिरता नजर आ रहा है। यहां वन विभाग के नए निर्देशों के बाद बुग्यालों में आम पर्यटकों के टेंट लगाकर रात्रि प्रवास करने पर रोक लगी है।
ग्रामीणों की आजीविका पर संकट
इस संबंध में विभाग ने स्पष्ट किया है कि उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय के आदेशानुसार छूट केवल ‘श्री नंदादेवी राजजात’ के श्रद्धालुओं के लिए है, सामान्य पर्यटकों के लिए नहीं।
जानेंक्या है पूरा मामला
वर्ष 2018 में हाईकोर्ट नैनीताल ने बुग्यालों में टेंट लगाकर रुकने पर रोक लगाई थी, जिसके खिलाफ राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट गई थी। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद 11 सितंबर 2026 को वन क्षेत्राधिकारी पूर्व पिंडर रेंज (देवाल) ने ‘इंडिया हैक्स’ एजेंसी को 19 साहसिक पर्यटकों के लिए रूपकुंड यात्रा का परमिट (परमिट संख्या 2 व 3, बुक संख्या 77) जारी कर दिया था। पर्यटकों का यह दल जब देवाल ब्लॉक के अंतिम गांव वांण पहुंचा, तो स्थानीय ग्रामीणों ने ढोल-दमाऊ और फूलमालाओं के साथ उनका भव्य स्वागत किया और वीडियो सोशल मीडिया पर साझा की।
वन विभाग की सख्त कार्रवाई
वीडियो वायरल होने के बाद वन संरक्षक गढ़वाल वृत्त आकाश कुमार वर्मा ने कड़ा संज्ञान लेते हुए डीएफओ बद्रीनाथ को कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके बाद डीएफओ बद्रीनाथ ने रेंज अधिकारी देवाल के माध्यम से 11 सितंबर को जारी परमिट को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया। जिसमें 19 सदस्यीय पर्यटक दल के लिए जारी परमिट रद्द कर दिया गया है और रास्ते में गए पर्यटकों को वापस बुलाए जाने की संभावना है। डीएफओ की पूर्व लिखित सहमति के बिना अब रूपकुंड ट्रेक का कोई भी नया परमिट जारी नहीं किया जाएगा। बुग्यालों में रात्रि प्रवास की छूट केवल नंदा राजजात यात्रियों के लिए है; सामान्य पर्यटन हेतु हाईकोर्ट की रोक यथावत लागू है।