अल्मोड़ा: प्रेमचंद जयंती के अवसर पर अल्मोड़ा यूथ क्लब द्वारा कार्यक्रम का आयोजन किया गया इस आयोजन का उद्देश्य केवल प्रेमचंद को याद करना नहीं था, बल्कि उनके साहित्य को आज के सामाजिक संदर्भों में समझना, उस पर विचार-विमर्श करना और युवाओं के बीच संवाद की संस्कृति को विकसित करना था।
कार्यक्रम की थीम
कार्यक्रम की मुख्य थीम थी—”प्रेमचंद की कहानियाँ आज भी हमारे समाज में कहाँ-कहाँ दिखाई देती हैं, वे किन रूपों में हमारे सामने उपस्थित हैं, और उनसे प्रेरणा लेकर हम समाज में क्या सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं?” कार्यक्रम में शामिल युवा साथियों ने पहले से प्रेमचंद की विभिन्न कहानियों का अध्ययन किया था। ओपन माइक के दौरान प्रत्येक प्रतिभागी ने अपनी पढ़ी हुई कहानी का केवल सार प्रस्तुत नहीं किया, बल्कि उसके पात्रों, घटनाओं और सामाजिक संदेशों को वर्तमान समय की परिस्थितियों से जोड़ते हुए अपनी स्वतंत्र समझ और दृष्टिकोण भी साझा किया। चर्चा के दौरान जाति, वर्ग, गरीबी, शिक्षा, असमानता, महिलाओं की स्थिति, श्रम, मानवीय संवेदनाएँ और सामाजिक न्याय जैसे अनेक विषयों पर गंभीर संवाद हुआ। प्रतिभागियों ने इस बात पर भी विचार रखा कि प्रेमचंद की कहानियों में उठाए गए कई प्रश्न आज भी समाज के सामने उसी प्रकार मौजूद हैं और उनके समाधान के लिए संवेदनशील नागरिकों की सक्रिय भूमिका आवश्यक है।
कार्यक्रम का आयोजन
कार्यक्रम की विशेषता यह रही कि युवाओं ने अपनी अभिव्यक्ति के लिए विभिन्न माध्यमों का प्रयोग किया। कुछ साथियों ने प्रेमचंद की कहानियों को कविता के रूप में प्रस्तुत किया, कुछ ने कहानी के पात्रों के माध्यम से अपने विचार रखे, जबकि कई युवाओं ने अपने जीवन के व्यक्तिगत अनुभवों को प्रेमचंद की कहानियों से जोड़ते हुए बताया कि किस प्रकार साहित्य हमें स्वयं को और समाज को बेहतर ढंग से समझने का अवसर देता है। इससे कार्यक्रम केवल कहानी-वाचन तक सीमित न रहकर एक जीवंत और सहभागितापूर्ण संवाद में बदल गया।
किया यह आह्वान
इस अवसर सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय से 2 प्रोफेसर सहित अनेक सामाजिक कार्यकर्ताओं, शिक्षकों और साहित्यप्रेमियों ने सहभागिता की। सभी अतिथियों ने युवाओं के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि प्रेमचंद का साहित्य आज भी समाज को समझने और मानवीय मूल्यों को मजबूत करने की दिशा में अत्यंत प्रासंगिक है। उन्होंने युवाओं से निरंतर पढ़ने, विचार करने और सामाजिक सरोकारों से जुड़े रहने का आह्वान किया।
रखें विचार
कार्यक्रम में युवाओं को सामाजिक रूप से सक्रिय होने और सकारात्मक परिवर्तन की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों ने यह संकल्प लिया कि वे केवल प्रेमचंद जयंती जैसे अवसरों पर ही नहीं, बल्कि पूरे वर्ष साहित्य, समाज और समकालीन मुद्दों पर नियमित संवाद की परंपरा को आगे बढ़ाएंगे। युवाओं ने इस बात पर भी सहमति व्यक्त की कि प्रेमचंद की कहानियाँ केवल पढ़ने के लिए नहीं हैं, बल्कि उनसे मिलने वाले मानवीय मूल्यों—समानता, न्याय, संवेदनशीलता, करुणा और सामाजिक उत्तरदायित्व—को अपने जीवन और समाज में उतारने का प्रयास ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। यह आयोजन साहित्य, संवाद और सामाजिक चेतना का एक सुंदर संगम रहा, जिसने यह सिद्ध किया कि यदि युवा पढ़ें, सोचें और मिलकर संवाद करें, तो साहित्य समाज में सकारात्मक परिवर्तन का प्रभावी माध्यम बन सकता है। इस कार्यक्रम में किरण ने संचालन किया। उपस्थित लोगों मे डॉ पूरन, डॉ आस्था, जगदीश भंडारी, संदीप सिंह नयाल, शिव, सतीश, अभिषेक, विकास, सुरेंद्र,हरीश,धीरज संदीप ने अपने अपने विचार रखे।