October 5, 2022

अल्मोड़ा: दहेज‌ मामले में अभियुक्त की जमानत याचिका स्वीकार, जानें पूरा मामला

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अरविन्द नाथ त्रिपाठी अपर सत्र न्यायाधीश, अल्मोड़ा की अदालत ने दहेज के मामले में अभियुक्त राकेश चन्द्र थाना अल्मोड़ा की जमानत याचिका स्वीकार की। जिसमें अधिवक्ता दीप चंद जोशी कृष्णा बाराकोटी, विक्रांत भटनागर, मनोज बृजवाल ,पंकज बजेठा, सुनील कुमार ग्वाल,सुनील तिवारी ने पैरवी की।

प्रस्तुत जमानत प्रार्थना पत्र अभियुक्त राकेश चन्द्र द्वारा थाना अल्मोड़ा के अपराध सं0-64 सन् 2021 अंतर्गत धारा 323, 377, 420, 495, 498ए 504 भा०दं०सं० व धारा-3 / 4 दहेज प्रतिषेध अधिनियम में जमानत हेतु प्रस्तुत किया गया है।
 
जाने पूरा मामला-

अभियुक्त का कथन है कि दिनांक 10.04.2022 से जिला कारागार, अल्मोड़ा में निरूद्ध है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा अभियुक्त का जमानत प्रार्थना पत्र दिनांक 29.04.2022 को खारिज किया गया। अभियुक्त पर लगाये गये सभी आरोप असत्य बेबुनियाद व निराधार है। अभियुक्त ने उपरोक्त धाराओं के अन्तर्गत कोई अपराध कारित नहीं किया है। अभियुक्त द्वारा कभी भी किसी के साथ किसी भी प्रकार के कोई अवैध ताल्लुकात या सम्बन्ध नहीं रहें हैं। रिपोर्टर द्वारा अभियुक्त को फंसाने की नियत से उस पर गलत आरोप लगाये गये हैं। रिपोर्टर व अभियुक्त बचपन से ही एक-दूसरे को जानते थे तथा रिपोर्टर का विवाह पूर्व से ही अभियुक्त के घर आना-जाना था। अभियुक्त ने रिपोर्टर के पिता से कभीभी कोई धनराशि नहीं ली है। अभियुक्त अपने घर देहरादून में रहकर प्रापर्टी इत्यादि का कार्य करता है तथा रिपोर्टर अल्मोड़ा एस०एस० जे० परिसर में नौकरी करती हैं और अधिकांशतः अल्मोड़ा में ही रहती हैं, कभी कभार ही वह अभियुक्त से मिलने उसके घर जाया करती थी, तो उसके साथ शारीरिक व मानसिक उत्पीड़न का प्रश्न ही नहीं उठता है और न ही अभियुक्त व उसके परिवार वालों द्वारा कभी भी रिपोर्टर के साथ कोई शारीरिक या मानसिक उत्पीड़न किया गया। अभियुक्त के लिए लोन लेने वाली बात रिपोर्टर ने गलत कही है। रिपोर्टर ने स्वयं जमीन खरीदने व मकान बनाने के लिए बैंक से ऋण लिया था, किन्तु कितना ॠण लिया, इसकी जानकार अभियुक्त को नहीं है। रिपोर्टर ने कभी भी अभियुक्त को उसके कार्य के लिए कोई धनराशि नहीं दी। अभियुक्त स्वयं अच्छा कमाने में सक्षम है। अभियुक्त ने ना तो रिपोर्टर के पिता की जमीन बेची और न ही उनके साथ कोई धोखाधड़ी की सभी आरोप निराधार हैं। अभियुक्त का किसी भी प्रकार का कोई पूर्व आपराधिक इतिहास नहीं है। प्रथम सूचना रिपोर्ट में देरी का कोई कारण दर्शित नहीं किया गया है। अभियुक्त को धारा 41 दं०प्र०सं० का नोटिस भी नहीं दिया गया, जबकि उस पर लगाये गये आरोप इतने गम्भीर प्रकृति के नहीं है, फिर भी उसे जबरदस्ती गिरफ्तार किया गया। अभियुक्त को यदि जमानत पर रिहा किया जाता है, तो अपनी जमानत का किसी भी प्रकार का दुरूपयोग नहीं करेगा। अभियुक्त के भागने का भी कोई अंदेशा नहीं है तथा अभियुक्त के द्वारा गवाहों को प्रभावित नहीं किया जायेगा एवं बिना न्यायालय के आदेश के वह अपना शहर देहरादून छोड़कर कहीं भी नहीं जायेगा। अतः अभियुक्त को जमानत पर रिहा किये जाने की प्रार्थना की गयी। अभियुक्त की ओर से जमानत प्रार्थना पत्र के समर्थन में दिनेश चन्द्र पुरी का शपथ पत्र का०सं०-4ख मय आधार कार्ड की स्वयं प्रमाणित प्रति का०स०-7ख को प्रस्तुत किया गया है। 4. बहस के दौरान अभियुक्त के विद्वान अधिवक्ता द्वारा दस्तावेज का०सं०-10ख पावर ऑफ एटोर्नी दिनांकित 28 दिसम्बर, 2019 की छायाप्रति पावर आफ एटोर्नी दिनांकित 27 जून 2020 की छायाप्रति, विक्रय पत्र दिनांकित 12 मार्च, 2019 की छायाप्रति प्रस्तुत किया गया ।विवेचक की आख्या में आया है, परन्तु अभियुक्त का कोई आपराधिक इतिहास विवेचक ने अपनी आख्या में नहीं बताया है विवेचक के अनुसार मामला पति-पत्नी से सम्बन्धित होने के कारण काउंसिलिंग की कार्यवाही की गयी और रिपोर्ट प्राप्ति के पश्चात मामला पंजी किया समस्त तथ्यों को देखते हुए मामला पारिवारिक विवाद से सम्बन्धित दर्शित होता है। अभियुक्त दिनांक 11.04.2022 से जिला कारागार में निरूद्ध है। मामला मजिस्ट्रेट न्यायालय द्वारा विचारणीय है। समस्त तथ्यों एव परिस्थितियों को देखते हुए मामले के गुण-दोष में राय व्यक्त न करते हुए न्यायालय इस मत का है कि अभियुक्त सशर्त जमानत पर रिहा किये जाने योग्य हैं।

जमानत प्राथना पत्र-

अभियुक्त ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से न्यायायल में जमानत प्राथना पत्र दाखिल की। विद्वान सहायक अभियोजन अधिकारी एवं अभियुक्त के विद्वान अधिवक्ता को जमानत के प्रश्न पर सुना व पत्रावली का अवलोकन किया गया। अभियुक्त राकेश चन्द्र पुत्र स्व० देव प्रकाश की ओर से प्रस्तुत जमानत प्रार्थना पत्र स्वीकार किया जाता है। 11. अभियुक्त को संबंधित मजिस्ट्रेट की संतुष्टि पर रू0 30,000 /- (रूपये तीस हजार) का स्व बंध-पत्र व समान राशि के दो विश्वसनीय प्रतिभू प्रस्तुत करने पर जमानत पर रिहा किया जाये। 12. इसके अतिरिक्त अभियुक्त पर यह शर्त अधिरोपित किया जाता है कि वह अभिकथित अपराध की पुनरावृति नहीं करेगा, विवेचना में सहयोग करेगा, साक्षियों को किसी भी प्रकार से प्रभावित नहीं करेगा तथा बिना न्यायालय की अनुमति से विदेश यात्रा नहीं करेगा।