अल्मोड़ा: अल्मोड़ा लिटफेस्ट का दूसरा दिन: शास्त्रीय सुरों और कथावाचन के साथ गूंजा ‘कालिदास’ से ‘ग्लेशियर’ तक का विमर्श, जलवायु संकट पर हुई सार्थक परिचर्चा

अल्मोड़ा: सांस्कृतिक नगरी अल्मोड़ा में आयोजित प्रतिष्ठित ‘अल्मोड़ा लिटरेचर फेस्टिवल 2026’ के दूसरे दिन कला, साहित्य और गंभीर संवाद का अद्भुत संगम देखने को मिला।

हुई चर्चा

इस महोत्सव के दूसरे दिन संगीत की शास्त्रीय परंपराओं, भावपूर्ण कथावाचन और पर्यावरण जैसे गंभीर विषयों पर हुए विमर्श ने सुधी श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।‌ जानकारी के अनुसार दिन की शुरुआत देश के प्रख्यात शास्त्रीय गायक हिमांशु दरमोड़ा के मनमोहक गायन से हुई। उन्होंने रागों के कुशल संयोजन और अपनी सुरीली आवाज से श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया। इसके बाद जानी-मानी कथावाचक हीना आलम ने अपनी अनूठी और जीवंत शैली में एक दिल को छू लेने वाली कहानी प्रस्तुत की, जिससे पंडाल में बैठा हर व्यक्ति सीधे संवेदनाओं से जुड़ गया।

​’कहो कालिदास’ पुस्तक पर गहन मंथन

​इस महोत्सव के पहले पैनल डिस्कशन का केंद्र सुप्रसिद्ध लेखक युगल जोशी की सद्यःप्रकाशित पुस्तक ‘कहो कालिदास’ रही। प्रख्यात विदुषी दीवा भट्ट और दीपा गुप्ता ने मुख्य वक्ता के रूप में हिस्सा लेते हुए बताया कि लेखक ने महाकवि कालिदास की प्राचीन रचनाओं को समकालीन पाठकों के लिए बेहद सरल हिंदी में प्रस्तुत किया है। यह पुस्तक वर्तमान पीढ़ी को हमारे साहित्यिक अतीत से जोड़ने में मील का पत्थर साबित होगी।

​जलवायु परिवर्तन और हिमनदों के संरक्षण पर हुई चर्चा

​महोत्सव में ‘क्लाइमेट फ्यूचर्स एंड ग्लेशियल लॉस’ (जलवायु का भविष्य और हिमनदों का कम होना) विषय पर एक अत्यंत महत्वपूर्ण सत्र आयोजित हुआ। वरिष्ठ पत्रकार रोमोला बुटालिया की अध्यक्षता वाले इस सत्र में जी.बी. पंत संस्थान के वैज्ञानिक डॉ. आई.डी. भट्ट, पर्वतारोही अनुराग मालू और हर्षित रौतेला मुख्य वक्ता रहे। डॉ. आई.डी. भट्ट ने हिममंडल और अल्पाइन वनों के संरक्षण पर संस्थान के शोधों को रेखांकित किया।ग्लेशियर रिट्रीट पर गहरी चिंता जताई गई और निचले इलाकों की सुरक्षा के लिए ग्लेशियर झीलों की मैपिंग को बेहद जरूरी बताया गया। वैज्ञानिक ज्ञान को आम लोगों तक प्रभावी माध्यमों से पहुंचाने पर जोर दिया गया। अन्नपूर्णा अभियान के उत्तरजीवी अनुराग मालू ने मौत के मुंह से वापस लौटने के अपने चमत्कारी अनुभवों को साझा किया, जबकि हर्षित रौतेला ने पहाड़ों के साथ अपने आत्मीय संबंधों का जिक्र किया।