अल्मोड़ा:चालक का बेटा बना वायु सेना में  फ्लाइंग ऑफिसर

अल्मोड़ा: डॉ. राहुल बिष्ट ने फ्लाइंग ऑफिसर बन कर अपने परिवार और क्षेत्र का नाम रोशन किया है। उनकी उपलब्धि पर गांव में जश्न का माहौल है।

वायु सेना में फ्लाइंग ऑफिसर बनकर देश की सेवा करेंगे डॉ. राहुल

अल्मोड़ा भैसियाछाना ब्लॉक के गैनार सेराघाट गांव की आजीविका संस्था में चालक के बेटे डॉ. राहुल सिंह बिष्ट अब भारतीय वायु सेना में फ्लाइंग ऑफिसर बनकर देश की सेवा करेंगे।

दादा से मिली प्रेरणा

   डॉ. राहुल बिष्ट ने फोन पर बताया कि उनके पिता कृष्ण सिंह बिष्ट आजीविका संस्था में वाहन चालक हैं। जबकि माता हेमा बिष्ट गृहणी हैं। बहन रजनी बिष्ट रसायन विज्ञान से एमएससी कर रही है, छोटा भाई रविंद्र  इंटरमीडिएट के बाद जेईई मेंस की तैयारी कर रहा है। राहुल बिष्ट का बचपन से ही सेना में अधिकारी बनने का सपना था। जिसे अपनी मेहनत के बल पर उसने पूरा कर दिखाया है। राहुल बिष्ट ने बताया कि उसके दादा सेना से सेवानिवृत्त हुए थे। उन्हीं से प्रेरणा लेकर आज वह अधिकारी बने हैं।

2018 में ऑल इंडिया नीट परीक्षा अच्छे अंकों के साथ उत्तीर्ण की

राहुल ने वर्ष 2018 में ऑल इंडिया नीट परीक्षा अच्छे अंकों के साथ उत्तीर्ण की जिसमें उनका आर्म्ड फोर्सज मेडिकल कॉलेज (एएफएमसी) पुणे के लिए चयन हुआ। राहुल ने लगन और कड़ी मेहनत से एएफएमसी पुणे से एमबीबीएस की पढ़ाई कॉलेज टॉप करने के साथ गोल्ड मेडल प्राप्त किया। नौ जून गुरुवार को हुई पासिंग आउट परेड में राहुल के माता पिता ने उन्हें स्टार लगाए और इस मौके पर उनके दादा-दादी, चाचा- चाची, भाई -बहन मौजूद रहे।

सफलता का श्रेय माता-पिता तथा गुरुजनों को दिया

राहुल ने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता तथा गुरुजनों को दिया। वर्तमान में राहुल का चयन कमांड हॉस्पिटल बेंगलुरु में एयर फोर्स कॉलेज में फ्लाइंग आफिसर के पद पर हुआ है। राहुल के फ्लाइंग ऑफिसर बनने पर विधायक मनोज तिवारी और क्षेत्र वासियों ने खुशी जताई है।

दो बार एनडीए की लिखित परीक्षा पास करने के बाद मेडिकल में अनफिट होने पर भी नहीं मानी हार

राहुल बिष्ट की प्राथमिक शिक्षा हल्द्वानी से हुई है, कक्षा 6 से 12 तक की पढ़ाई सैनिक स्कूल घोड़ाखाल से प्राप्त की है। मन में कुछ करने की तमन्ना हो और हौसले बुलंद हो तो अपने लक्ष्य तक पहुंचा जा सकता है। ऐसा ही डॉ. राहुल बिष्ट ने कर दिखाया। दो बार एनडीए की लिखित परीक्षा पास करने के बाद मेडिकल में अनफिट होने पर निराश नहीं हुए।