अल्मोड़ा: उत्तराखंड के पांच जनपदों से आईं 40 से अधिक महिलाओं ने चितई में जैविक खेती और महिला सशक्तिकरण के अनूठे मॉडल का अध्ययन किया।
किया अध्ययन
जिसमें राज्य जैविक केंद्र, मजखाली द्वारा आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत आयोजित इस शैक्षिक भ्रमण ने प्रतिभागियों को आत्मनिर्भरता की नई दिशा दिखाई। प्रगतिशील कृषक लता कांडपाल ने भ्रमणकारी महिलाओं को जैविक कृषि की बारीकियां सिखाईं। उन्होंने प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और टिकाऊ खेती के महत्व पर जोर देते हुए बताया कि किस प्रकार आधुनिक तकनीकों को अपनाकर पारंपरिक खेती को लाभप्रद बनाया जा सकता है। उन्होंने विशेष रूप से ‘पुष्प उत्पादन’ को किसानों की आय बढ़ाने का एक सशक्त जरिया बताया।
दी यह जानकारी
प्रशिक्षण के दौरान लता कांडपाल ने महिलाओं को बायो-ब्रिकेट के निर्माण और जैविक खेती में उसकी उपयोगिता के बारे में व्यावहारिक जानकारी दी। साथ ही, उन्होंने अपने आउटलेट का उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे स्थानीय कृषि उत्पादों, प्रसंस्कृत वस्तुओं और हस्तशिल्प के जरिए महिलाएं स्वयं का व्यवसाय खड़ा कर आर्थिक रूप से स्वतंत्र हो सकती हैं। जिसमे चमोली, रुद्रप्रयाग, पौड़ी, टिहरी और देहरादून के स्वयं सहायता समूहों व महिला समूहों की 40 से अधिक महिलाएं शामिल रही। जैविक खाद और उत्पादों का निर्माण, हस्तशिल्प से आय का सृजन और स्थानीय संसाधनों का बेहतर प्रबंधन जाना।भ्रमण के दौरान महिलाओं ने ऐतिहासिक चितई गोलू देवता मंदिर के दर्शन किए और स्थानीय लोक आस्था व संस्कृति को करीब से जाना।
’सीख को अपने क्षेत्रों में अपनाएंगी महिलाएं’
भ्रमण के बाद उत्साहित प्रतिभागियों ने कहा कि यह अनुभव उनके लिए बेहद प्रेरणादायक रहा। उन्होंने संकल्प लिया कि वे चितई में सीखी गई तकनीकों को अपने-अपने जनपदों में लागू करेंगी, ताकि जैविक खेती को बढ़ावा देने के साथ-साथ अन्य महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनाया जा सके।
रहें उपस्थित
इस अवसर पर राज्य जैविक केंद्र, मजखाली के प्रभारी डॉ. देवेंद्र नेगी एवं सुमन विशेष रूप से उपस्थित रहे।