आज 17 अप्रैल 2027 है। आज दर्श अमावस्या है। हिंदू धर्म में प्रत्येक मास की अमावस्या तिथि को दर्श अमावस्या के रूप में मनाया जाता है। इस दिन आसमान में चंद्र देवता के दर्शन नहीं होते हैं। अमावस्या के स्वामी पितर देवता होते हैं। पौराणिक मान्यता के अनुसार अमावस्या तिथि का नाम अमावसु पितर के नाम पर रखा गया है। जिस दर्श अमावस्या को पितरों के प्रति अपना आदर और आभार प्रकट करने के लिए अत्यंत ही फलदायी माना गया है। मार्गशीर्ष मास में पड़ने वाली दर्श अमावस्या को बेहद खास माना जाता है है। यह माह भगवान विष्णु को बेहद प्रिय है और यही कारण है कि इस दौरान पड़ने वाली अमावस्या का खास महत्व होता है। इस दिन विधि-विधान से पूजा करने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त हो सकती है और जातक को पुण्य फल प्राप्त होता है।
जानें शुभ मुहूर्त
• वैशाख के महीने को हिंदू धर्म में बहुत ही पवित्र और दान-पुण्य का महीना माना जाता है।
• अमावस्या तिथि की शुरुआत: 16 अप्रैल (गुरुवार), रात 8 बजकर 11 मिनट से शुरू होगा।
• अमावस्या तिथि का समापन: 17 अप्रैल (शुक्रवार), शाम 5 बजकर 21 मिनट पर रहेगा।
• मुख्य तिथि (उदयातिथि): उदयातिथि की गणना के आधार पर वैशाख अमावस्या 17 अप्रैल, शुक्रवार को मनाई जाएगी। दान-पुण्य और स्नान के लिए यही दिन सबसे श्रेष्ठ रहेगा।
खास होता है महत्व
धार्मिक मान्यता के अनुसार, दर्श अमावस्या के दिन पितरों की आत्माएं पृथ्वी पर अपने परिजनों से संपर्क स्थापित करने के लिए आती हैं। इस दिन तर्पण, पिंडदान और जलदान जैसे कर्म करने से पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलती है। तर्पण करने से पितर तृप्त होते हैं और संतुष्ट होकर अपने वंशजों को आशीर्वाद देते हैं। इस दिन दान-पुण्य करने का भी विशेष महत्व होता है।