December 7, 2021

“राम के बिना अयोध्या, अयोध्या नहीं है, अयोध्या तो वही है, जहां राम हैं – राष्ट्रपति

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राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने  कहा कि “राम के बिना अयोध्या, अयोध्या नहीं है। अयोध्या तो वही है, जहां राम हैं। इस नगरी में प्रभु राम सदा के लिए विराजमान हैं। इसलिए यह स्थान सही अर्थों में अयोध्या है।” रविवार को अयोध्या के रामकथा पार्क में रामायण कान्क्लेव के उद्घाटन के बाद अपने संबोधन के दौरान उन्होंने यह बात कही ।
राष्ट्रपति ने कहा कि अयोध्या का शाब्दिक अर्थ है, ‘जिसके साथ युद्ध करना असंभव हो’। रघु, दिलीप, अज, दशरथ और राम जैसे रघुवंशी राजाओं के पराक्रम एवं शक्ति के कारण उनकी राजधानी को अपराजेय माना जाता था। इसलिए इस नगरी का ‘अयोध्या’ नाम सर्वदा सार्थक रहेगा।

रामायण में दर्शन के साथ-साथ आदर्श आचार संहिता भी उपलब्ध

राष्ट्रपति कोविंद ने कहा कि रामायण में दर्शन के साथ-साथ आदर्श आचार संहिता भी उपलब्ध है, जो जीवन के प्रत्येक पक्ष में हमारा मार्गदर्शन करती है। संतान का माता-पिता के साथ, भाई का भाई के साथ, पति का पत्नी के साथ, गुरु का शिष्य के साथ, मित्र का मित्र के साथ, शासक का जनता के साथ और मानव का प्रकृति एवं पशु-पक्षियों के साथ कैसा आचरण होना चाहिए, इन सभी आयामों पर, रामाय में उपलब्ध आचार संहिता, हमें सही मार्ग पर ले जाती है।

रामचरितमानस में एक आदर्श व्यक्ति और एक आदर्श समाज दोनों का है वर्णन

राष्ट्रपति ने कहा कि रामचरितमानस में एक आदर्श व्यक्ति और एक आदर्श समाज दोनों का वर्णन मिलता है। राम राज्य में आर्थिक समृद्धि के साथ-साथ आचरण की श्रेष्ठता का बहुत ही सहज और हृदयग्राही विवरण मिलता है- नहिं दरिद्र कोउ, दुखी न दीना। नहिं कोउ अबुध, न लच्छन हीना।। ऐसे अभाव-मुक्त आदर्श समाज में अपराध की मानसिकता तक विलुप्त हो चुकी थी। दंड विधान की आवश्यकता ही नहीं थी। किसी भी प्रकार का भेद-भाव था ही नहीं। राष्ट्रपति ने रामचरित मानस की चौपाई का उदाहरण दिया कि ‘दंड जतिन्ह कर भेद जहँ, नर्तक नृत्य समाज। जीतहु मनहि सुनिअ अस, रामचन्द्र के राज॥

अनेक चौपाइयों से मिलती है त्याग करने और कर्मठ होने की प्रेरणा

उन्होंने कहा कि यह दैव तो कायर के मन का एक आधार है यानी तसल्ली देने का तरीका है। आलसी लोग ही भाग्य की दुहाई दिया करते हैं। ऐसी सूक्तियों के सहारे लोग जीवन में अपना रास्ता बनाते चलते हैं। राष्ट्रपित राम नाथ कोविंद ने कहा कि रामचरित-मानस की पंक्तियां लोगों में आशा जगाती हैं, प्रेरणा का संचार करती हैं और ज्ञान का प्रकाश फैलाती हैं। आलस्य एवं भाग्यवाद का त्याग करके कर्मठ होने की प्रेरणा अनेक चौपाइयों से मिलती है ‘कादर मन कहुं एक अधारा। दैव दैव आलसी पुकारा।।

विश्व के अनेक देशों में रामकथा की प्रस्तुति का उल्लेख

राष्ट्रपति ने विश्व के अनेक देशों में रामकथा की प्रस्तुति का उल्लेख किया और कहा कि इन्डोनेशिया के बाली द्वीप की रामलीला विशेष रूप से प्रसिद्ध है। मालदीव, मारिशस, त्रिनिदाद व टोबेगो, नेपाल, कंबोडिया और सूरीनाम सहित अनेक देशों में प्रवासी भारतीयों ने रामकथा एवं रामलीला को जीवंत बनाए रखा है। रामकथा का साहित्यिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक प्रभाव मानवता के बहुत बड़े भाग में देखा जाता है। भारत ही नहीं विश्व की अनेक लोक-भाषाओं और लोक-संस्कृतियों में रामायण और राम के प्रति सम्मान और प्रेम झलकता है।
उन्होंने कहा कि ‘मैं तो समझता हूं कि मेरे परिवार में जब मेरे माता-पिता और बुजुर्गों ने मेरा नामकरण किया होगा, तब उन सब में भी संभवतः रामकथा और प्रभु राम के प्रति वही श्रद्धा और अनुराग का भाव रहा होगा जो सामान्य लोकमानस में देखा जाता है।