निकल आती हैं खामियां , आदमी हैं!भला भगवान थोड़े हैं – डॉ.ललित योगी की कुछ ‘अनकही स्मृतियों’ से
भूल निकल आती हैं खामियांआदमी हैं!भला भगवान थोड़े हैं।हो जाती हैं गलतियां भी भूल सेभला हम कंप्यूटर थोड़े हैं।।करने वालों से ही होती हैं-अक्सर काम में गलतियां।बात बात पर गलती गिनाने वालोंकी तरह हम हुनरबाज थोड़े हैं। अनकही स्मृतियां मशीन हो गया हूँ✍️ रोबोट सी हो चुकी जिंदगी,और चलती…