सावधान: आज से लग रहा है सबसे खतरनाक ‘मृत्यु पंचक’, आने वाले 5 दिन रहें बेहद सावधान, 5 नक्षत्रों का बन रहा है अशुभ योग, भूलकर भी न करें यह काम

देश दुनिया की खबरों से हम आपको रूबरू कराते रहते हैं। एक ऐसी खबर हम आपके सामने लाए हैं। हिंदू धर्म और ज्योतिष शास्त्र में पंचक को बेहद महत्वपूर्ण माना गया है। आज यानी 6 जून से पंचक की शुरुआत हो रही है। जो अगले 5 दिनों तक चलेगी।

मृत्यु पंचक

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस बार का पंचक बेहद खास और संवेदनशील है, क्योंकि इसकी शुरुआत आज शनिवार से हो रही है। शनिवार से शुरू होने वाले पंचक को ‘मृत्यु पंचक’ कहा जाता है, जिसे सभी पंचकों में सबसे खतरनाक, कष्टकारी और अशुभ माना गया है।
​जानें क्यों खास और खतरनाक है ‘मृत्यु पंचक’

​ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब चंद्रमा कुंभ और मीन राशि में गोचर करता है, तो उस काल को पंचक कहा जाता है। चंद्रमा को इन दोनों राशियों के पांच नक्षत्रों— धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद और रेवती— को पार करने में लगभग 5 दिन का समय लगता है, इसलिए इसे पंचक कहते हैं।
​सभी पंचक अशुभ नहीं होते, लेकिन शनिवार से शुरू होने के कारण इसे ‘मृत्यु पंचक’ का नाम दिया गया है। मान्यता है कि इन 5 दिनों में यमराज की ऊर्जा सक्रिय रहती है, जिससे दुर्घटना, चोट लगने, गंभीर बीमारी या किसी बड़े विवाद में फंसने की संभावना काफी बढ़ जाती है।
​मृत्यु पंचक में क्या ‘न’ करें? (वर्जित कार्य)

​धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन 5 दिनों में शुभ व मांगलिक कार्यों की सख्त मनाही होती है। इस दौरान निम्नलिखित कार्य भूलकर भी नहीं करने चाहिए।
• ​घर की छत डालना: यदि आपके घर का निर्माण कार्य चल रहा है, तो इन 5 दिनों के लिए लेंटर या छत डलवाने का काम रोक दें। इसके अलावा नया निर्माण शुरू करना भी वर्जित है।
• ​दक्षिण दिशा की यात्रा: पंचक के दौरान दक्षिण दिशा में यात्रा करने से बचना चाहिए, क्योंकि इस दिशा को यमराज और पितरों की दिशा माना जाता है।
• ​लकड़ी और चारपाई: इन दिनों में लकड़ी इकट्ठा करना और चारपाई बुनना पूरी तरह वर्जित माना गया है।
सावधानी: इस अवधि में वर्जित कार्य करने से जीवन में गंभीर बाधाएं, भारी धन हानि या किसी बड़ी अनहोनी का भय बना रहता है।

यदि पंचक में हो जाए किसी की मृत्यु, तो करें ये उपाय

मान्यता है कि यदि पंचक काल में किसी व्यक्ति की मृत्यु हो जाए, तो उस परिवार या कुल पर बड़ा संकट आने की आशंका रहती है।
• ​नियम: पंचक शांति के बिना शव का दाह संस्कार नहीं करना चाहिए।
• ​उपाय: इस अशुभ प्रभाव को शांत करने के लिए अंतिम संस्कार के समय अर्थी या चिता के साथ पाँच नारियल (श्रीफल) रखे जाते हैं और विधि-विधान से पंचक शांति की विशेष पूजा की जाती है।
मृत्यु पंचक में क्या करें

ऐसा नहीं है कि पंचक में सभी कार्य बंद हो जाते हैं। इस दौरान कुछ विशेष कार्यों में सफलता भी मिलती है।
• ​बिजनेस और कोर्ट-कचहरी: मृत्यु पंचक के दौरान कोई नई बिजनेस डील की जा सकती है या सरकारी काम निपटाए जा सकते हैं। इसके अलावा, कानूनी विवादों और कोर्ट-कचहरी के मामलों को सुलझाने के लिए यह समय अच्छा माना जाता है।
• ​पूजा-पाठ: अशुभ प्रभावों से बचने के लिए घर में शांत माहौल रखें। इन दिनों भगवान शिव और हनुमान जी की आराधना विशेष फलदायी होती है। महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें।
• ​दान-पुण्य: संकटों से रक्षा के लिए इन 5 दिनों में गरीबों और जरूरतमंदों की सहायता व दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है।