उत्तराखंड को जनजातीय राज्य का दर्जा और 5वीं अनुसूची लागू करने की उठी मांग, इस दिन देहरादून में बड़े आंदोलन की चेतावनी

उत्तराखंड: उत्तराखंड के पर्वतीय मूल निवासियों को जनजातीय दर्जा दिलाने और राज्य में 5वीं अनुसूची लागू करने की मांग को लेकर उत्तराखंड एकता मंच (यूईएम) ने एक व्यापक जनआंदोलन का ऐलान किया है।

की यह मांग

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक संगठन ने आगामी 22 नवंबर को सुबह 11 बजे देहरादून के परेड ग्राउंड से एक विशाल प्रदर्शन और जनसमागम का आह्वान किया है। इस पूरे अभियान का मुख्य नारा “हमसे छीने गए अधिकार वापस हों” तय किया गया है। इस संबंध में मंच के गढ़वाल प्रभारी महावीर राणा ने कहा कि उत्तराखंड के पर्वतीय मूल निवासी जनजातीय (ट्राइब) दर्जा पाने के सभी कड़े मानकों को पूरा करते हैं, इसके बावजूद उन्हें अब तक उनके संवैधानिक अधिकारों से वंचित रखा गया है। मंच के पदाधिकारियों के अनुसार, राज्य के पर्वतीय क्षेत्रों में भौगोलिक परिस्थितियां, सामाजिक-आर्थिक स्थिति और पारंपरिक जीवनशैली पूरी तरह ट्राइब स्टेटस के अनुकूल हैं। मंच ने ऐतिहासिक दस्तावेजों और पूर्व की व्यवस्थाओं का हवाला देते हुए राज्य सरकार से मांग की है कि वह विधानसभा में उत्तराखंड को जनजातीय राज्य घोषित करने का प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार को भेजे। उत्तराखंड एकता मंच ने प्रदेश भर के लोगों से 22 नवंबर को अधिक से अधिक संख्या में देहरादून पहुंचकर इस आंदोलन को सफल बनाने की अपील की है।

5वीं अनुसूची लागू होने से राज्य को निम्नलिखित लाभ मिलेंगे। जिसमें

• ​जल, जंगल और जमीन पर स्थानीय निवासियों का मालिकाना हक।
• ​शिक्षा और सरकारी नौकरियों में विशेष आरक्षण का लाभ
• ​पर्वतीय क्षेत्रों की सांस्कृतिक एवं भाषाई पहचान का संरक्षण।
• ​ग्राम सभाओं को अधिक अधिकार और महिलाओं की कानूनी सुरक्षा।
• ​वनाधिकार कानून का प्रभावी व जमीनी क्रियान्वयन।