October 1, 2023

Khabribox

Aawaj Aap Ki

नई पॉलीहाउस प्रौद्योगिकी से किसानों की बागवानी फसलें कमाएंगी अधिक मुनाफ़ा

किसानी और बागवानी के क्षेत्र में नित नए प्रयोग किए जा रहे हैं, जिससे तकनीक का इस्तेमाल कर इन क्षेत्रों को और अधिक उन्नत किए जा सके। आखिरकार इस सबका फायदा देश के किसानों को मिलेगा, जिससे उनकी आमदनी बढ़ेगी और जीवन स्तर में सुधार होगा। इसी दिशा में एक कदम है पॉलीहाउस तकनीक से बागबानी फसल की पैदावार करना। शनिवार को दुर्गापुर में वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद-केंद्रीय यांत्रिक अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान (सीएसआईआर-सीएमईआरआई), के निदेशक डॉ. (प्रो.) हरीश हिरानी ने पंजाब के लुधियाना में “नेचुरली वेंटिलेटेड पॉलीहाउस फैसिलिटी” का उद्घाटन किया और “रिट्रैक्टेबल रूफ पॉलीहाउस” की आधारशिला रखी।

कीट-पतंगों और बेमौसम की मार से मिलेगी राहत

प्रोफेसर हिरानी ने इस नई प्रौद्योगिकी के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि किसानों को अत्यधिक या अपर्याप्त ठंड, गर्मी, बारिश, हवा, और अपर्याप्त वाष्पोत्सर्जन से जुड़े अन्य कारकों जैसी कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इसके अलावा भारत में कीटों के कारण भी वर्तमान में लगभग 15% फसल का नुकसान होता है तथा इस नुकसान की बढ़ने की और भी संभावना है क्योंकि जलवायु परिवर्तन, कीटों के खिलाफ पौधों की रक्षा प्रणाली को कमजोर करता है। सुखद बात यह है कि पॉलीहाउस से बहुत हद तक इन समस्याओं को दूर किया जा सकता है। पारंपरिक पॉलीहाउस में मौसम की विसंगतियों और कीटों के प्रभाव को कम करने के लिए एक स्थिर छत होती है। हालांकि, छत को ढंकने के अब भी नुकसान हैं, जो कभी-कभी अत्यधिक गर्मी और अपर्याप्त प्रकाश का कारण बनते हैं। इसके अलावा, वे कार्बन डाईऑक्साइड, वाष्पोत्सर्जन और पानी के अपर्याप्त स्तर के लिहाज से भी संदेवनशील होते हैं। खुले क्षेत्र की स्थितियों और पारंपरिक पॉलीहाउस स्थितियों का संयोजन भविष्य में जलवायु परिवर्तन और उससे जुड़ी समस्याओं से निपटने के लिहाज से एक ज्यादा बेहतर तरीका है।

क्या है रिट्रैक्टेबल रूफ पॉलीहाउस टेक्नोलॉजी ?

डॉ. हरीश हिरानी ने यह भी बताया कि केंद्रीय यांत्रिक अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान (सीएमईआरआई) एक्सटेंशन सेंटर लुधियाना में एक “रिट्रैक्टेबल रूफ पॉलीहाउस टेक्नोलॉजी” स्थापित कर रहा है। हर मौसम में काम करने लिहाज से उपयुक्त इस प्रतिष्ठान में ऑटोमैटिक रिट्रैक्टेबल रूफ (स्वचालित रूप से खुलने-बंद होने वाली छत) होगा, जो पीएलसी सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करते हुए कंडीशनल डेटाबेस से मौसम की स्थिति और फसल की जरूरतों के आधार पर संचालित होगा। इस प्रौद्योगिकी से किसानों को मौसमी और गैर-मौसम वाली दोनों ही तरह की फसलों की खेती करने में मदद मिलेगी। यह पारंपरिक खुले मैदानी और प्राकृतिक रूप से हवादार पॉली हाउस की तुलना में इनडोर सूक्ष्म जलवायु परिस्थितियों का निर्माण करके उच्च उपज प्राप्त कर सकता है, और साथ ही यह जैविक खेती के लिए फायदेमंद भी है।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की ली जा रही है मदद

इस प्रौद्योगिकी के विकास में लगी रिसर्च टीम का नेतृत्व करने वाले वरिष्ठ वैज्ञानिक जगदीश माणिकराव ने बताया कि रिट्रैक्टेबल रूफ का उपयोग सूर्य के प्रकाश की मात्रा, गुणवत्ता एवं अवधि, जल तनाव, आर्द्रता, कार्बन डाई-ऑक्साइड और फसल एवं मिट्टी के तापमान के स्तर को बदलने के लिए किया जाएगा। वहीं फार्म मशीनरी एंड प्रिसिजन एग्रीकल्चर के प्रमुख और वरिष्ठ प्रधान वैज्ञानिक डॉ. प्रदीप राजन ने बताया कि यह प्रतिष्ठान वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद-हिमालय जैवसंपदा प्रौद्योगिकी संस्थान (सीएसआईआर-आईएचबीटी), पालमपुर के सहयोग से विकसित किया जा रहा है और फसल के आधार पर पॉलीहाउस को स्वचालित करने में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का प्रयोग, प्रक्रिया में है। यह मौसम की जरूरतों और इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी) पर आधारित होगा तथासक्षम किसान अनुकूल यूजर इंटरफेस प्रदान करेगा।

नैचुरली वेंटिलेटेड पॉलीहाउस और रिट्रैक्टेबल रूफ पॉलीहाउस एक साथ होंगे स्थापित

निदेशक ने यह भी बताया कि चूंकि नई पॉलीहाउस प्रणाली के लाभों पर वैज्ञानिक प्रयोगात्मक आंकड़े की कमी है, इसलिए फसल उत्पादन और उपज की गुणवत्ता की तुलना करने के लिए प्राकृतिक रूप से हवादार पॉलीहाउस और रिट्रैक्टेबल रूफ पॉली हाउस दोनों में बागवानी फसलों की खेती की जाएगी। उन्होंने कहा कि नैचुरली वेंटिलेटेड पॉलीहाउस और रिट्रैक्टेबल रूफ पॉलीहाउस को साथ-साथ स्थापित करके, हम जरूरी वैज्ञानिक आंकड़ा प्राप्त कर सकते हैं और परिणामों का विश्लेषण करके उत्पादकता बढ़ा सकते हैं। इस प्रतिष्ठान का उपयोग किसानों के लिए एक प्रदर्शनी खेत के रूप में किया जाएगा।

error: Content is protected !!