दुनिया के सभी देशों में लोगों को जनसंख्या के प्रति जागरूक करने के प्रयास को समर्पित है विश्व जनसंख्या दिवस। संयुक्त राष्ट्र के नेतृत्व में यह दिवस 11 जुलाई को मनाया जाता है। इस दिवस को मनाने का उद्देश्य केवल जनसंख्या के प्रति लोगों को जागरूक करना मात्र नहीं है, बल्कि ऐसे लोग जो जरूरी सुविधाओं से वंचित हैं, ऐसे लोग जिनके स्वास्थ्य, शिक्षा और जीविका पर ध्यान देने की जरूरत है, उनके लिए कुछ करने की चाह को भी बल देना है। इस दिवस को मनाने का उद्देश्य लोगों को अनियंत्रित ढंग से बढ़ने वाली जनसंख्या के परिणामों के प्रति जागरूक करना है। इसमें कोई शक नहीं, कि कम जनसंख्या घनत्व वाले क्षेत्रों का विकास ज्यादा तेजी से होता है, कम जनसंख्या वाले क्षेत्रों में बीमारी कम फैलती है और कम जनसंख्या घनत्व वाले क्षेत्रों में भोजन, पानी, शिक्षा, स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना आसान होता है।
11 जुलाई 1987 को विश्व जनसंख्या दिवस मनाने का निर्णय लिया
संयुक्त राष्ट्र ने पहली बार 11 जुलाई 1987 को विश्व जनसंख्या दिवस मनाने का निर्णय लिया और उसके ठीक दो वर्ष बाद यानी 11 जुलाई 1989 को पहला विश्व जनसंख्या दिवस मनाया गया। अगर दुनिया की आबादी की बात करें तो 1804 में दुनिया की जनसंख्या 1 बिलियन यानी 100 करोड़ हुई। 1927 में दो बिलियन, 1960 में 3 बिलियन, 2000 में 6 बिलियन। यानी महज 40 वर्ष में दुनिया की आबादी दुगनी हो गई। वहीं 24 अप्रैल 2017 को विश्व की जनसंख्या 7.5 बिलियन हो गई।
2023 में चीन को पीछे छोड़ दुनिया का सबसे अधिक जनसंख्या वाला देश बन जायेगा
संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि भारत 2023 में चीन को पीछे छोड़ दुनिया का सबसे अधिक जनसंख्या वाला देश बन जायेगा। एक रिपोर्ट में संयुक्त राष्ट्र के आर्थिक और सामाजिक मामलों के विभाग, जनसंख्या प्रभाग ने कहा कि विश्व की जनसंख्या 15 नवंबर 2022 को आठ अरब तक पहुंचने का अनुमान है।
विकासशील देशों में जन्म दर में कमी आई है
रिपोर्ट के अनुसार कई विकासशील देशों में जन्म दर में कमी आई है। आने वाले दशकों में दुनिया की आबादी में आधे से अधिक वृद्धि आठ देशों- कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य, मिस्र, इथियोपिया, भारत, नाइजीरिया, पाकिस्तान, फिलीपींस और तंजानिया में होगी।
संयुक्त राष्ट्र ने इस बात की भी चिंता जताई
संयुक्त राष्ट्र ने इस बात की भी चिंता जताई है कि समय पर जनगणना नहीं हो पाने की वजह से विपरीत प्रभाव पड़ सकते हैं। क्योंकि सरकारें जब कोई भी नीति बनाती है या किसी स्कीम की घोषणा करती है, तो उसके पहले भौगोलिक सर्वेक्षण के साथ-साथ देश, राज्य, शहर या गांव की जनसंख्या का अध्ययन किया जाता है। जाहिर है जब शहरों को लेकर नीति निर्धारण करना होता है, तब चीजें जटिल हो जाती हैं, उनके पीछे सबसे बड़ा कारण शहरों पर पड़ रहा जनसंख्या का दबाव और घनी आबादी है
पृथ्वी के प्रति हमारी साझा जिम्मेदारी है
महासचिव एंटोनियो गुतरस ने कहा कि दुनिया की कुल जनसंख्या हमें याद दिलाती है कि पृथ्वी के प्रति हमारी साझा जिम्मेदारी है और एक दूसरे के लिए हमारे कई दायित्व और प्रतिबद्धताएं हैं।