केंद्रीय हिंदी संस्थान के दिल्ली केंद्र में भारतीय भाषा दिवस के उपलक्ष्य में संगोष्ठी का आयोजन हुआ।इसका विषय था – ‘आत्म निर्भर भारत के निर्माण में भारतीय भाषाओं की भूमिका।’
विविध भारतीय भाषाओं के मध्य सहोदरी भाव एवं समरसता बोध विकसित करके ही भारतवर्ष का सर्वांगीण विकास किया जा सकता है
इस अवसर पर भारतीय भाषा दिवस की परिकल्पना को साकार करने वाले आचार्य चमू कृष्ण शास्त्री का उल्लेख हुआ तथा महाकवि सुब्रह्मण्यम भारती की रचनाशीलता का भी गुणगान किया गया।कार्यक्रम की अध्यक्षता बहुश्रुत संरक्षक एवं केंद्रीय हिंदी शिक्षण मंडल के उपाध्यक्ष अनिल शर्मा जोशी ने की।मुख्य समन्वयक दिल्ली केंद्र की निदेशक डॉ . मंजू राय थीं । मुख्य वक्ता राजभाषा उपनिदेशक देवी प्रसाद मिश्र थे और मुख्य अतिथि प्रोफेसर राम जी दुबे थे।संगोष्ठी में विषय प्रवर्तन दिल्ली विश्वविद्यालय की सक्रिय वरिष्ठ प्रोफेसर माला मिश्र ने किया।उन्होंने अत्यंत प्रभावी एवं महत्वपूर्ण विषय प्रवर्तन करते हुए कहा कि विविध भारतीय भाषाओं के मध्य सहोदरी भाव एवं समरसता बोध विकसित करके ही भारतवर्ष का सर्वांगीण विकास किया जा सकता है ओर तभी भारत उन्नतिऔर आत्म निर्भरता के लक्ष्य को प्राप्त कर पायेगा।इस संदर्भ में उन्होंने नई शिक्षा नीति के मातृभाषा शिक्षण के प्रावधानों का भी उल्लेख करते हुए उनकी उपयोगिता पर प्रकाश डाला।
समस्त भारतीय भाषाओं में ज्ञान – विज्ञान की सम्पूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने को महनीय बताया
अनिल शर्मा जोशी ने समस्त भारतीय भाषाओं में ज्ञान – विज्ञान की सम्पूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने को महनीय बताया। देवी प्रसाद मिश्र ने सांस्कृतिक सामंजस्य को राष्ट्र कल्याण के लिए उपयोगी बताया।रामजी दुबे ने मातृ भाषा शिक्षण का महत्व रेखांकित किया।डॉ . मंजू ने रवींद्रनाथ ठाकुर के उद्धरण से विचार साम्य प्रकट करते हुए भाषा की महत्ता बताई।प्रश्नसत्र में समस्त प्रतिभागियों ने विचारोतेजक चर्चा को गति प्रदान की।प्रमाणपत्र वितरण के साथ कार्यक्रम पूर्ण हुआ।