पीसीबी के आदेश पर रोक, हाईकोर्ट के आदेश के बाद लाखों कर्मचारियों और उद्यमियों को मिली राहत

नैनीताल उच्च न्यायालय ने गुरुवार को एक याचिका पर सुनवाई के बाद उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीसीबी) के आदेश पर रोक लगा दी, जिसमें ग्रीन बॉडी के 1724 उद्योगों के अनापत्ति प्रमाण पत्र को रद्द करने के आदेश को चुनौती दी गई थी।

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने प्रदूषण बोर्ड में रजिस्ट्रेशन नहीं कराने पर 1724 उद्योगों का अनापत्ति प्रमाण पत्र रद्द कर दिया था

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने इसी साल 2 दिसंबर के अपने आदेश में एक्सटेंडेड प्रोड्यूसर रिस्पॉन्सिबिलिटी (ईपीआर) एक्शन प्लान पेश नहीं करने और प्रदूषण बोर्ड में रजिस्ट्रेशन नहीं कराने पर 1724 उद्योगों का अनापत्ति प्रमाण पत्र रद्द कर दिया था। इस आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है। नैनीताल हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश विपिन सांघी और न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की खंडपीठ के फैसले से 1724 उद्योगों और वहां कार्यरत लाखों कर्मचारियों को राहत मिली है।कोर्ट ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को 20 दिसंबर तक अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।

2 दिसंबर के आदेश को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की

कुमाऊं गढ़वाल चेंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड सिडकुल मैन्युफैक्चरर्स ने राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के 2 दिसंबर के आदेश को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की है।सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से कोर्ट को बताया गया कि पीसीबी ने अपने आदेश में कहा है कि राज्य के 1724 उद्योगों ने भारत सरकार द्वारा अधिसूचित प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स – 2016 की धारा 13 का पालन नहीं किया है।

हाईकोर्ट के  आदेश पर रोक लगने से उद्यमियों को तत्काल राहत

मैनेजमेंट रूल्स – 2016 की धारा 13 का पालन नहीं किया है। चैंबर ऑफ कॉमर्स के माध्यम से उद्योगपतियों की ओर से दायर याचिका में हाईकोर्ट से अनुरोध किया गया था कि पीसीबी के आदेश को रद्द कर उद्योगों को संचालन की अनुमति दी जाए।  हाईकोर्ट के उक्त आदेश पर रोक लगने से उद्यमियों को तत्काल राहत मिली है।