17 मई: तीन साल बाद आज से पुरूषोत्तम मास की शुरुआत, एक माह तक मांगलिक कार्यों में रहेगा विराम, जानें क्यों लगता है अधिमास

आज 17 मई 2026 है। आज से पुरूषोत्तम मास की शुरुआत हो रही है। इस वर्ष पुरुषोत्तम मास (अधिकमास या मलमास) की शुरुआत 17 मई से हो रही है और यह पावन महीना 15 जून 2026 तक चलेगा। इस वर्ष गणना के आधार पर कुल 13 महीने होंगे। हर तीन साल में आने वाली ‘अधिकमास’ की स्थिति के कारण इस बार ज्येष्ठ का महीना दो बार आएगा। आज 17 मई से दूसरा ज्येष्ठ मास (अधिकमास) शुरू होगा, जो 15 जून तक चलेगा। इसी अतिरिक्त महीने को पुरुषोत्तम मास ,खरमास आदि भी कहा जाता है।

यह कार्य वर्जित

यह हिन्दू पंचांग का एक अतिरिक्त चंद्र मास है जो हर लगभग 32 महीनों में एक बार आता है। इस वर्ष ज्येष्ठ माह में यह अधिकमास पड़ रहा है, जिसके कारण ज्येष्ठ का महीना दो बार (एक सामान्य और एक अधिक) गिना जाएगा। इस पूरे महीने को स्वयं भगवान विष्णु का माना जाता है। अधिक मास के दौरान विवाह, यज्ञ, देव प्रतिष्ठा, मुंडन संस्कार, गृह प्रवेश, भूमि खरीदना, संपत्ति का विक्रय, नई गाड़ी खरीदना तथा अन्य शुभ मांगलिक कार्य करने की मनाही होती है। इस दौरान जाप, तप करने का विशेष महत्व है। इस अवधि के दौरान शादी, मुंडन, और गृह प्रवेश जैसे सांसारिक और मांगलिक कार्यों (काम्य कर्मों) को करने से परहेज किया जाता है। यह महीना आंतरिक शुद्धि, जप, व्रत और दान-पुण्य के लिए सर्वोत्तम माना गया है। इस समय किए गए दान का फल कई गुना अधिक मिलता है।

जानें शुभ मुहूर्त

हिंदू पंचांग के अनुसार, साल 2026 में अधिक मास 17 मई, रविवार से शुरू हो रहा है, जो 15 जून 2026, सोमवार को समाप्त होगा। इस दौरान किसी भी तरह से मांगलिक और शुभ कार्यों  को करने का मनाही होती है।

जानें अधिमास के बारे में

अधिक मास लगने का कारण हिंदू पंचांग की गणना पद्धति में छिपा है, जो चंद्र कैलेंडर पर आधारित होती है। एक सौर वर्ष में लगभग 365 दिन होते हैं, जबकि चंद्र वर्ष करीब 354 दिनों का होता है। इस तरह हर साल लगभग 11 दिनों का अंतर बन जाता है। यह अंतर धीरे-धीरे बढ़ते हुए करीब 32 महीने 16 दिन में लगभग एक पूरे महीने के बराबर हो जाता है। तब इस अंतर को संतुलित करने के लिए पंचांग में एक अतिरिक्त महीना जोड़ दिया जाता है। इसी अतिरिक्त महीने को अधिक मास, मलमास या पुरुषोत्तम मास कहा जाता है।

भगवान विष्णु का माह

मान्यता है कि पुरुषोत्तम मास भगवान विष्णु को समर्पित होता है। इस दौरान विष्णु सहस्रनाम पाठ, भगवद्गीता अध्ययन, उपवास, तीर्थ स्नान, दान-पुण्य और गरीबों की सेवा का विशेष महत्व माना गया है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार नारद पुराण के अनुसार मलमास का कोई देवता स्वामी बनने को तैयार नहीं था। तब भगवान विष्णु ने उसे अपना नाम देते हुए ‘पुरुषोत्तम मास’ कहा और स्वयं उसका स्वामी बनने का वरदान दिया। इसी कारण इस माह को भगवान विष्णु की विशेष कृपा पाने का समय माना जाता है।