उत्तराखंड: रक्षाबंधन का पर्व सावन माह की पूर्णिमा को पूरे देश में भाई-बहन के पवित्र रिश्ते के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है। कल 28 अगस्त को रक्षाबंधन का त्योहार है। इस अवसर पर उत्तराखंड के चमोली जिले की उर्गम घाटी में स्थित प्रसिद्ध ‘वंशी नारायण मंदिर’ के कपाट विशेष रूप से खोले जाते हैं।
की जाती है पूजा-अर्चना
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक वंशी नारायण मंदिर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह साल के 364 दिन पूरी तरह बंद रहता है। रक्षाबंधन के दिन सूर्योदय के समय मंदिर के कपाट खोले जाते हैं और सूर्यास्त होते ही इन्हें फिर से पूरे एक साल के लिए बंद कर दिया जाता है। इस मंदिर में भगवान नारायण (विष्णु) और भगवान शिव दोनों की मूर्तियां स्थापित हैं, जहां रक्षाबंधन के दिन स्थानीय लोग पहुंचकर पूजा-अर्चना करते हैं।
जानिए रक्षाबंधन पर ही क्यों खुलते हैं कपाट
पौराणिक कथा के अनुसार मान्यता है कि भगवान विष्णु राजा बलि की भक्ति से प्रसन्न होकर पाताल लोक में उनके द्वारपाल बन गए थे। जब काफी समय तक माता लक्ष्मी को भगवान विष्णु के दर्शन नहीं हुए, तो वह नारद मुनि के पास पहुंचीं। नारद मुनि के सुझाव पर माता लक्ष्मी ने सावन पूर्णिमा (रक्षाबंधन) के दिन राजा बलि को रक्षासूत्र बांधकर भगवान विष्णु को पाताल लोक से मुक्त कराया।
पाताल लोक से मुक्त होने के बाद भगवान विष्णु ने सबसे पहले उत्तराखंड के इसी वंशी नारायण मंदिर में दर्शन दिए थे। मान्यता है कि साल के बाकी 364 दिन स्वयं नारद मुनि यहां भगवान विष्णु की पूजा करते हैं, क्योंकि रक्षाबंधन के दिन वह माता लक्ष्मी के साथ पाताल लोक गए थे। इसी परंपरा और पौराणिक मान्यता का पालन करते हुए रक्षाबंधन के दिन मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोले जाते हैं।