उत्तराखंड: चारधाम यात्रा 2026: मंदिर परिसरों में मोबाइल और रील बनाने पर लगेगा प्रतिबंध, बीकेटीसी ने कसी कमर, अब तक इतने लाख पंजीकरण

उत्तराखंड से जुड़ी खबर सामने आई है। उत्तराखंड में स्थित विश्व प्रसिद्ध चारधाम यात्रा अगले माह से शुरू होने वाली है। आगामी विश्व प्रसिद्ध चारधाम यात्रा को लेकर बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस वर्ष यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं में भारी उत्साह है। अब तक 6 लाख से अधिक श्रद्धालु अपना पंजीकरण करा चुके हैं। मात्र दो सप्ताह (6 से 16 मार्च) के भीतर कुल 6,17,853 श्रद्धालुओं ने पंजीकरण कराया है। वहीं मंगलवार को देहरादून में आयोजित एक पत्रकार वार्ता में बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने यात्रा की नई गाइडलाइन्स और व्यवस्थाओं की जानकारी साझा की। बीकेटीसी अध्यक्ष ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि सभी तैयारियां समय सीमा के भीतर पूरी कर ली जाएं।

मंदिर परिसर में रील और फोटोग्राफी पर सख्ती

​धामों की धार्मिक मर्यादा और अनुशासन बनाए रखने के लिए इस बार कड़े कदम उठाए जा रहे हैं।
• ​मोबाइल बैन: मंदिर परिसरों में एक निर्धारित दूरी तक मोबाइल फोन के उपयोग पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा।
• ​SOP तैयार: रील बनाने, फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी को नियंत्रित करने के लिए विशेष मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) बनाई जा रही है।
• ​60 मीटर का दायरा: यूट्यूबर और ब्लॉगरों के लिए दर्शन के बाद 60 मीटर की परिधि तक विशेष नियम लागू करने पर विचार किया जा रहा है।

​गैर-सनातनियों के प्रवेश पर रोक का प्रस्ताव

​अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने बताया कि हाल ही में संपन्न बैठक में धामों में गैर-सनातनियों के प्रवेश पर रोक लगाने का प्रस्ताव पारित किया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सभी व्यवस्थाएं आदि शंकराचार्य की परंपरा और सनातन धर्म की मान्यताओं के अनुरूप की जा रही हैं।

​बजट और अन्य सुविधाएं

​समिति ने वर्ष 2026-27 के लिए 121 करोड़ रुपये से अधिक का बजट पारित किया है।
• ​पूजा शुल्क में वृद्धि: विभिन्न पूजा सेवाओं के शुल्कों में लगभग 10% की वृद्धि का प्रस्ताव है।
• ​डिजिटल सेवा: ऑनलाइन पूजा प्रणाली को और अधिक सुदृढ़ और पारदर्शी बनाया जा रहा है।
• ​ऋषिकेश ट्रांजिट कैंप: यात्रियों की सहायता के लिए 15 अप्रैल तक ऋषिकेश में मंदिर समिति का कार्यालय खोल दिया जाएगा।
• ​बुनियादी ढांचा: केदारनाथ में पुनर्निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका है, जबकि बदरीनाथ में कार्य अंतिम चरण में है। यात्रियों के लिए क्लॉक रूम, बेहतर पेयजल, विद्युत और आवास की व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है।