उत्तराखंड: निर्माण श्रमिकों के सेहत पर चिंताजनक आंकड़े, लैब ऑन व्हील जांच में दिल की बीमारी और बीपी के खतरों का संकेत

​उत्तराखंड: उत्तराखंड में निर्माण कार्यों में दिन-रात पसीना बहाने वाले श्रमिकों की सेहत को लेकर सामने आए शुरुआती आंकड़े एक बड़ा चिंता का विषय है।

चलाया यह अभियान

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड (बीओसीडब्ल्यू) द्वारा चलाए गए अभियान में श्रमिकों की सेहत में दिल की धड़कन (ईसीजी-टेकीकार्डिया) और ब्लड प्रेशर (बीपी) से जुड़ी गंभीर असमानताएं देखने को मिली हैं। प्रदेश के लगभग तीन लाख श्रमिकों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने के उद्देश्य से श्रम विभाग ने ‘मुख्यमंत्री श्रमिक स्वास्थ्य योजना’ के तहत ‘लैब ऑन व्हील’ (मोबाइल लैब) की शुरुआत की है। इस योजना के तहत श्रमिकों को एक्स-रे, खून की जांच और बीपी चेकअप समेत कुल 44 प्रकार की टेस्ट सुविधाएं निश्शुल्क उपलब्ध कराई जा रही हैं। अभियान के दौरान 957 एक्स-रे टीबी स्क्रीनिंग और 13 एचआईवी जांचें भी संपन्न की गईं।
• ​चंपावत: सर्वाधिक 7,296 श्रमिकों की जांच
• ​देहरादून: 4,991 श्रमिक
• ​पौड़ी गढ़वाल: 3,419 श्रमिक
• ​हरिद्वार: 2,613 श्रमिक
• ​चमोली: 2,153 श्रमिक
• ​नैनीताल: 1,853 श्रमिक
• ​अल्मोड़ा व बागेश्वर: क्रमशः 1,084 और 1,069 जांचें
• इसके अलावा पिथौरागढ़, रुद्रप्रयाग, टिहरी गढ़वाल, ऊधमसिंह नगर और उत्तरकाशी जिलों में भी बड़ी संख्या में टेस्ट दर्ज किए गए।

बीमारी की पुष्टि

रिपोर्ट्स के मुताबिक श्रम विभाग के अधिकारियों का कहना है कि मोबाइल लैब से प्राप्त आंकड़े प्रारंभिक स्क्रीनिंग के हैं। इनमें हृदय गति तेज होने (टेकीकार्डिया) और हाई बीपी (सिस्टोलिक व डायस्टोलिक) के लक्षण तो मिले हैं, लेकिन वास्तविक बीमारी की पुष्टि विशेषज्ञ डॉक्टरों की विस्तृत जांच के बाद ही हो सकेगी। जिन श्रमिकों की रिपोर्ट में असामान्यताएं पाई गई हैं, उन्हें आगे के इलाज और चिकित्सकीय परामर्श के लिए भेजा जा रहा है।