August 11, 2022

उत्तराखंड: बच्चों में बढ़ते मानसिक तनाव के चलते प्रदेश में बढ़ रहे हैं आत्महत्या और गुमशुदगी के मामले, जानिये आंकड़े

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बच्चों में  बढ़ते मानसिक तनाव के चलते देश में कई चौंकाने वाले मामले सामने आ रहे हैं। राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़ों के मुताबिक 2019 और 2020 के दौरान केवल उत्तराखंड में 1062 नाबालिग बच्चे गायब हो गए थे। जिनमें 477 बालक व 585 बालिकाएं शामिल हैं।

मानसिक तनाव के चलते बढ़ रहे आत्महत्या के मामले

राज्य में मानसिक तनाव के चलते बच्चे घर से भागने और आत्महत्या करने जैसा कदम उठा रहे हैं। पुलिस की ओर से 701 बच्चों को बरामद किया गया। इसमें से आपरेशन स्माइल के तहत 315 बच्चे बरामद किए गए। आपरेशन स्माइल के तहत बरामद बच्चों से पूछताछ में यह बात सामने आयी है।
बाल मनोविज्ञानियों का कहना है कि कोरोनाकाल में बच्चों के जीवन में हुए अनचाहे बदलावों से बच्चों की मानसिक स्थिति प्रभावित हुई है। जैसे स्कूल बंद होने से बच्चों का रूटीन बिगड़ा है, मानसिक कठिनाई के समय में बच्चों को माता पिता व शिक्षकों का पूरा साथ नहीं मिल पाना, बीमार स्वजन के बारे में लगातार सुनने व करीबी जन की मौत से उत्पन्न असुरक्षा की भावना, अधिक समय तक का अकेलापन भविष्य की मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के लिए खतरा और शारीरिक सक्रियता में कमी, स्क्रीन पर अधिक समय बिताना व अनियमित नींद कुछ ऐसे प्रमुख कारण हैं जिसने बच्चों को मानसिक स्तर पर कमजोर कर दिया है।

यह बात आई सामने

जब पुलिस विभाग की ओर से जब बातचीत की गई तो 210 बच्चों ने बताया कि स्वजन ने उन्हें डांटा जिसके कारण तनाव में आकर वह भाग गए। इसके अलावा आठ बच्चे पारिवारिक विवाद, 10 बच्चे बिछड़ गए थे, एक बच्चा पढ़ाई के कारण व अन्य 86 बच्चे शामिल हैं। इसपर बात करते हुए बाल मनोविज्ञानी डा. वीना कृष्णन बताती हैं कि कोरोनाकाल के कारण बच्चे घर पर ही कैद रहे, जिसके कारण उनके मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ा है। स्वजन की ओर से बच्चों की तरफ ध्यान नहीं दिया गया। इस कारण उनकी जीवनशैली में बदलाव आया है। बच्चों को यह लग रहा है कि उनके जाने से किसी पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। इसके अलावा परिजनों को सजा देने के लिए बच्चे घर से भागने और आत्महत्या करने जैसे कदम रहा रहे हैं।

15 सितंबर से 14 अक्टूबर तक अभियान शुरू किया गया है

उत्तराखंड में आपरेशन स्माइल अभियान चलाया जाता रहा है। इस बार 15 सितंबर से 14 अक्टूबर तक अभियान शुरू किया गया है। आपरेशन स्माइल व एसपी अपराध और कानून व्यवस्था की नोडल अधिकारी श्वेता चौबे ने बताया कि नाबालिग बच्चों की गुमशुदगी को लेकर  2015 से 2020 तक चले अभियान के दौरान अब तक 1876 नाबालिग बच्चों को बरामद कर उनके स्वजन के हवाले किया जा चुका है। इनमें 1382 बालक और 494 बालिकाएं शामिल हैं। और आगे भी इस अभियान को जारी रखने के लिए योजना बनायी गयी है। इसके अलावा उन्होंने परिजनों से आग्रह किया हैं कि वे बच्चों की मानसिक स्थिति को समझें और उनको सहारा दें ताकि वे ऐसा कदम ना उठाएं।