उत्तराखंड: उत्तराखंड के पहाड़ों में सदियों से उगाए जाने वाले पारंपरिक अनाज— मंडुआ, झंगोरा, चौलाई और कोदा जो पौष्टिकता से भरपूर भी है, वह अब वैज्ञानिक शोध के केंद्र में आ गए हैं।
शोध की ली जानकारी
हैदराबाद स्थित भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद के राष्ट्रीय पोषण संस्थान (ICMR-NIN) में इन स्थानीय कृषि उत्पादों के विशेष पोषक तत्वों को लेकर अध्ययन किया जा रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक बीते दिनों बुधवार को पीआईबी (PIB) देहरादून द्वारा आयोजित हैदराबाद प्रेस टूर के दूसरे दिन उत्तराखंड के 15 सदस्यीय मीडिया प्रतिनिधिमंडल ने ICMR-NIN का दौरा किया। इस दौरान संस्थान के वैज्ञानिकों ने पोषण अनुसंधान और जन-स्वास्थ्य से जुड़े शोध कार्यों की विस्तृत जानकारी दी। जिस पर ICMR-NIN की निदेशक डॉ. भारती कुलकर्णी ने बताया कि राज्य के पारंपरिक अनाजों के न्यूट्रिशनल प्रोफाइल को वैज्ञानिक आधार पर समझा जा रहा है। रागी (फिंगर मिलेट) का एनीमिया पर क्या असर पड़ता है, इसको लेकर क्लिनिकल और एनालिटिकल स्टडीज जारी हैं।