उत्तराखंड से जुड़ी खबर सामने आई है। सितंबर माह में नवरात्रि भी शुरू हो रहें हैं। नवरात्र और त्योहारी सीजन में उपवास करने वाले लोग कुट्टू के आटे से बने पकवानों का सेवन करते हैं।
जारी की एसओपी
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पिछले साल चैत्र नवरात्र में दून और हरिद्वार में कुट्टू के आटे से बने पकवान खाने के बाद बड़ी संख्या में लोग बीमार पड़ गए थे। जिसके बाद अब त्योहार शुरू होने से पहले ही खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) ने अलर्ट मोड में सभी टीमों को तैनात कर दिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक इस संबंध में आयुक्त एफडीए डॉ. आर. राजेश कुमार ने एसओपी जारी की है। जिसमें बताया गया है कि अब कुट्टू का आटा केवल सीलबंद पैकेट में ही बिकेगा। बिना लाइसेंस और पंजीकरण वाले किसी भी व्यापारी को कुट्टू आटे का निर्माण, भंडारण या बिक्री करने की अनुमति नहीं होगी। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
जानें व्रत में क्यों खाया जाता है
कुट्टू की गिनती फल में होती है। बकव्हीट पौधे से निकलने वाले फल तिकोने आकार के होते हैं, जिसे पीसकर आटा तैयार किया जाता है। इसी आटे को कुट्टू का आटा कहा जाता है। व्रत रखने वाले इस आटे की पूड़ियां, पकौड़ी, पराठे या चीला खाना पसंद करते हैं।
पोषण से भरपूर कुट्टू का आटा
कुट्टू का आटा प्रोटीन से भरपूर होता है। इसमें मैग्नीशियम, विटामिन-बी, आयरन, कैल्शियम, फॉलेट, जिंक, कॉपर, मैग्नीज और फास्फोरस जैसे तत्व भरपूर मात्रा में होते हैं। इसमें फाइटोन्यूट्रिएंट रूटीन भी होता है, जो कोलेस्ट्रोल और ब्लड प्रेशर को कम करता है। सेलियक रोग से पीड़ितों को भी इसे खाने की सलाह दी जाती है।