उत्तराखंड: पंचायत चुनाव: वोटिंग को लेकर हाईकोर्ट ने फिर दिया बड़ा फैसला, यह प्रत्याशी नहीं लड़ सकेंगे पंचायत चुनाव

उत्तराखंड से जुड़ी खबर सामने आई है। उत्तराखंड में नैनीताल हाईकोर्ट ने त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर बड़ा फैसला लिया है।

हाईकोर्ट का फैसला

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक हाईकोर्ट ने शुक्रवार को नगर निकाय और ग्राम पंचायत की दोनों मतदाता सूचियों में नाम शामिल करने के मामले पर सुनवाई की। जिसमें हाईकोर्ट उस दिशा निर्देश पर रोक लगाई है, जिसमें जिन मतदाताओं व त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव लड़ रहे प्रत्याशियों के नाम दो जगह, नगर निकाय और ग्राम पंचायत की मतदाता सूचियों में हैं, उन्हें मतदान करने व चुनाव लड़ने की अनुमति देने से संबंधित दिशा निर्देश है। उन दिशा निर्देशों में रोक लगाई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति जी नरेंद्र व न्यायमूर्ति आलोक मेहरा की खंडपीठ में गढ़वाल के शक्ति सिंह बर्त्वाल की ओर से जनहित याचिका दायर की। साथ ही हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि दो मतदाता सूचियों में नाम वाले प्रत्याशियों का चुनाव लड़ना पंचायत राज अधिनियम के विरुद्ध है। कोर्ट ने यह भी कहा कि पंचायत चुनाव की नामांकन प्रक्रिया पूरी हो जाने के कारण वह चुनाव में हस्तक्षेप नहीं कर रहा है।

दायर याचिका की सुनवाई

दरअसल आयोग की ओर से 6 जुलाई को इससे संबंधित नोटिफिकेशन जारी किया था जबकि जिला निर्वाचन अधिकारियों को 19 2019 को दिशा निर्देश जारी किए थे। लेकिन कोर्ट ने पंचायत चुनाव की नामांकन प्रक्रिया सम्पन्न होने पर वर्तमान चुनाव में हस्तक्षेप नहीं किया है। कोर्ट ने स्थानीय नगर निकाय और ग्राम पंचायत, दोनों मतदाता सूचियों में नाम वाले प्रत्याशियों के चुनाव लड़ने को पंचायत राज अधिनियम के विरुद्ध बताया है। हरिद्वार को छोड़कर राज्य के 12 जिलों में पंचायत चुनाव लड़ रहे कुछ प्रत्याशियों के नाम नगर निकाय और ग्राम पंचायत दोनों की मतदाता सूचियों में हैं। इन पर रिटर्निंग अधिकारियों ने अलग-अलग निर्णय लिए हैं। इससे कहीं प्रत्याशियों के नामांकन रद्द हो गए हैं तो कहीं उनके नामांकन स्वीकृत हो गए हैं। आगे  दो अलग मतदाता सूचियों में नाम होना आपराधिक माना जाता है। याचिका में उत्तराखंड में इस व्यवस्था पर सवाल उठाया गया है। याची ने राज्य निर्वाचन आयुक्त को 7 और 8 जुलाई को पत्र भेजकर उत्तराखंड में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में नगर निकाय चुनाव की मतदाता सूची में शामिल मतदाताओं को मतदान और नामांकन से रोकने के लिए दिशानिर्देश जारी करने का अनुरोध किया था। कोई सुनवाई न होने पर पंचायती राज अधिनियम की धारा 9 की उप धारा 6 व 7 का समुचित पालन न होने पर हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है।