अगस्त का महीना है। जिसमें भाई बहनों के अटूट प्रेम का त्योहार रक्षाबंधन भी है। यह त्योहार आगामी 09 अगस्त को है। ऐसे में बाजार में रंग बिरंगी राखियां सजने लगी है।
पिरूल की राखी
इन्हीं राखियो के साथ पिरूल, गोबर आदि से बनी राखियों की भी काफी डिमांड बढ़ रही है। वहीं उत्तराखंड के जंगलों में पाए जाने वाले पिरूल यानी पाइंस काफी मिलते हैं। इस पिरुल का इस्तेमाल न तो पशुओं के चारे में होता है और न ईंधन में। ऐसे में अब क्राफ्ट के लिए इनका तरह-तरह से इस्तेमाल हो रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक उत्तराखंड में अलग-अलग जगहों पर इनसे बनी टोकरियां, पर्स, लैप आदि के रूप में इस्तेमाल की चीजें बन रही हैं। रक्षाबंधन के इस सीजन में इसी पिरुल से बड़ी संख्या में डिजाइनर ऑर्गेनिक राखियां बन रही हैं। जिनकी देशभर से काफी डिमांड मिल रही है।