उत्तराखंड: भगवान शिव और माता पार्वती की पौराणिक विवाहस्थली के रूप में विश्वविख्यात ‘त्रियुगीनारायण’ अब आस्था के साथ-साथ एक सुव्यवस्थित वेडिंग डेस्टिनेशन के रूप में पहचान बनाने जा रहा है।
कार्य शुरू
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक उत्तराखंड के इस पवित्र धाम के समग्र विकास के लिए ‘ब्रिज, रोपवे, टनल एवं अन्य आधारभूत संरचना विकास निगम लिमिटेड’ (ब्रिडकुल) ने कार्य शुरू कर दिया है। जिसमें ब्रिडकुल के अनुसार, रुद्रप्रयाग जिले के ऊखीमठ ब्लॉक स्थित त्रियुगीनारायण क्षेत्र के विकास के लिए सबसे पहले डिजाइन और समग्र प्लानिंग से जुड़ी विशेषज्ञ कंसल्टेंसी सेवाएं ली जाएंगी। पूरे क्षेत्र का विकास पहाड़ी वास्तुशैली, प्राकृतिक परिवेश और धार्मिक महत्व को ध्यान में रखते हुए किया जाएगा।
धार्मिक पहचान से जुड़ेगा यह खास महत्व
त्रियुगीनारायण मंदिर परिसर में जल रही अखंड धूनी को शिव-पार्वती के विवाह की साक्षी माना जाता है। इसी मान्यता के कारण हर साल देश-विदेश से लोग यहां विवाह बंधन में बंधने आते हैं। अब शासन की योजना इस धार्मिक पहचान को आधुनिक डेस्टिनेशन वेडिंग और पर्यटन मॉडल से जोड़ने की है। क्षेत्र में ठहरने, खान-पान, स्थानीय परिवहन, सजावट और फोटोग्राफी जैसी सुविधाएं सुदृढ़ होने से स्थानीय होम-स्टे, कारोबार और सेवा क्षेत्र को सीधा आर्थिक लाभ मिलेगा।