उत्तराखंड: UCC कानून में हुआ यह बदलाव, अधिसूचना भी जारी, लिव इन में रहने वाले युगल व विवाह पंजीकरण को लेकर हुआ संशोधन

उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता कानून लागू कर दिया गया है। जो बीते 27 जनवरी को प्रदेश में लागू किया गया है। इसी बीच एक जरूरी खबर सामने आई है।

किया गया संशोधन

जिसमें जरूरी बदलाव किया गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक हाईकोर्ट के निर्देशों के क्रम में गृह विभाग ने अब इस नियमावली में संशोधन कर दिया है। इसे समान नागरिक संहिता चतुर्थ संशोधन नियमावली नाम दिया गया है। इसकी अधिसूचना जारी कर दी गई है।
अब प्रदेश के भीतर लिव इन में रहने वाले युगल की गोपनीयता और बढ़ाई गई है। इसके अलावा नियमावली से अब वैवाहिक पंजीकरण के लिए आधार कार्ड की अनिवार्यता को हटा दिया गया है।

किए गए संशोधन

📌📌21 वर्ष से कम उम्र वाले बालिगों के माता-पिता या अभिभावकों को सूचना देना जरूरी नहीं।
📌📌विवाह पंजीकरण के बाद किए गए धर्म परिवर्तन की सूचना देना जरूरी नहीं
📌📌लिव इन में धर्म परिवर्तन की जानकारी देना आवश्यक
📌📌लिव इन में अब पांच दिनों के स्थान पर पंजीकरण अधिकारी 24 घंटे में मांगेगे वांछित जानकारी
📌📌लिव इन में आने के लिए मृतक पत्नी अथवा पूर्व सहवासी के बारे में जानकारी देना स्वैच्छिक
📌📌लिव इन के दौरान अपनी जातियों से संबंधित जानकारी देना ऐच्छिक
📌📌लिव इन में धर्म गुरूओं से प्रमाण पत्र लेने की बाध्यता नहीं
📌📌लिव इन में पंजीकरण के लिए आधार नंबर के ओटीपी को भरने की अनिवार्यता भी समाप्त
📌📌लिव इन में पुलिस द्वारा जांच की व्यवस्था की व्यवस्था समाप्त

यह दस्तावेज भी मान्य

अब विवाह पंजीकरण के लिए आधार कार्ड के साथ ही पासपोर्ट, वोटर आइडी, राशन कार्ड, पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस व केंद्र या राज्य सरकारी जारी वैध अन्य पहचान पत्रों का भी उपयोग किया जा सकेगा। इसके लिए नियमावली में संशोधन कर दिया गया है।