आज 21 जनवरी 2025 है। आज मासिक कालाष्टमी है। वैदिक पंचांग के अनुसार, 21 जनवरी को मासिक कालाष्टमी है। यह पर्व हर माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन भगवान शिव के रौद्र रूप, काल भैरव की पूजा-अर्चना की जाती है।
जानें शुभ मुहूर्त
वैदिक पंचांग के अनुसार, माघ माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 21 जनवरी को दोपहर 12 बजकर 39 मिनट पर शुरू होगी और 22 जनवरी को दोपहर 03 बजकर 18 मिनट पर समाप्त होगी। कालाष्टमी पर निशा काल में काल भैरव देव की पूजा की जाती है। निशा काल में देर रात 12 बजकर 06 मिनट से लेकर 12 बजकर 59 मिनट पर काल भैरव देव की पूजा की जाएगी।
आज मासिक कालाष्टमी व्रत के दिन द्विपुष्कर योग बन रहा है। व्रत के दिन द्विपुष्कर योग सुबह 07 बजकर 14 मिनट से शुरू होगा। द्विपुष्कर योग को समापन दोपहर 12 बजकर 39 मिनट पर होगा। इस योग में पूजा का दोगुना फल मिलता है और मनोकामना पूरी होती है।
रूद्रावतार के रूप में हुई काल भैरव की उत्पत्ति
भगवान शिव के अंश काल भैरव की उत्पत्ति रुद्रावतार के रूप में हुई। शिव जी का अपमान करने पर काल भैरव प्रकट हुए थे और और ब्रह्म देव का एक सिर काट दिया था। काल भैरव इतने भयंकर और उग्र स्वरूप वाले हैं कि उनसे तो स्वयं काल भी भयभीत रहता है। आज के दिन काल भैरव की पूजा करने से सभी प्रकार के कष्ट, दोष और रोग दूर होते हैं। उनकी कृपा से अकाल मृत्यु का योग कट सकता है। आज काल भैरव के मंत्रों का जाप करने से सिद्धि प्राप्त होती है क्योंकि काल भैरव तंत्र और मंत्र के देवता हैं।
जानें काल भैरव जयंती का महत्त्व
हिंदू शास्त्रों के अनुसार भगवान काल भैरव भगवान शिव की भयावह अभिव्यक्ति हैं। इस दिन को भगवान काल भैरव की जयंती के रूप में मनाया जाता है इसलिए भगवान काल भैरव या भगवान शिव के भक्तों के लिए इस दिन का बहुत महत्व है। यह दिन अधिक शुभ माना जाता है जब इसे मंगलवार और रविवार के दिन मनाया जाता है क्योंकि ये दिन भगवान काल भैरव को समर्पित होते है। इसे महा काल भैरव अष्टमी या काल भैरव अष्टमी के नाम से भी जाना जाता है।