आज 18 सितंबर 2025 है। पितृपक्ष शुरू हो गये हैं। इस साल पितृ पक्ष 7 सितंबर 2025 से शुरू हुए है। भाद्रपद शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा से सोलह दिवसीय श्राद्ध प्रारंभ होते हैं और इस साल श्राद्ध पक्ष की शुरुआत 7 सितंबर 2025 को हो गई है। सनातन धर्म में पितरों की आत्माशांति और मोक्ष प्राप्ति के लिए पितृ पक्ष का समय बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस महीने में श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान से पितरों को मोक्ष मिलता है।
महत्वपूर्ण अनुष्ठानों में एक
द्वादशी श्राद्ध पितृ पक्ष के दौरान किए जाने वाले महत्वपूर्ण अनुष्ठानों में से एक है, जो उन पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए किया जाता है जिनकी मृत्यु द्वादशी तिथि को हुई थी, विशेषकर जिन्होंने सन्यास लिया हो। इस अनुष्ठान में ब्राह्मणों को भोजन कराना, पिंड दान और तर्पण करना शामिल है, जिससे पितरों को तृप्त किया जाता है और वे वंशजों को आशीर्वाद देते हैं।
सनातन धर्म में श्राद्ध पक्ष का विशेष धार्मिक महत्व
इस साल 7 सितंबर से पितृ पक्ष शुरू हुए है। जो 21 सितंबर को तक चलेगा। हिंदू पंचांग के अनुसार श्राद्ध पक्ष की प्रत्येक तिथियां महत्वपूर्ण मानी गई है। ऐसा इसलिए क्योंकि हर एक तिथि पर किसी न किसी पूर्वज का निधन हुआ होता है। इन तिथियां पर प्रत्येक वंशज अपने पूर्वजों के निमित्त श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करते हैं। परंतु इनमें बेहद खास तिथियों के रूप में भरणी श्राद्ध, नवमी श्राद्ध और सर्व पितृ अमावस्या या फिर अमावस्या श्राद्ध तिथि मानी गई हैं। पितृ पक्ष पूर्वजों के प्रति सम्मान प्रकट करने का समय है। श्राद्ध पक्ष में तर्पण, पिंडदान करने से न सिर्फ पितरों को तृप्ति मिलती है बल्कि पूर्वजों का ऋण भी चुकता हो जाता है। पितृ पक्ष भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि से अश्विन माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तक रहते हैं।