हरेंद्र बिष्ट की रिपोर्ट
थराली/नंदाधाम कुरूड़: उत्तराखंड की प्रसिद्ध श्री नंदा देवी बड़ी जात और लोकजात यात्रा 2026 अब अपने अंतिम पड़ावों की ओर पहुंच चुकी है।
श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़
होमकुंड में सफल पूजा-अर्चना के बाद श्री नंदा देवी बड़ी जात यात्रा अपने 19वें पड़ाव नंदानगर ब्लॉक के फरखेत गांव पहुंच गई है। वहीं, बधांण क्षेत्र की मां नंदा देवी राजराजेश्वरी की उत्सव डोली वापसी के अपने 5वें पड़ेव (कुल 23वें पड़ाव) थराली ब्लॉक के गोठिंड़ा गांव में विश्राम के लिए पहुंची। पूरे यात्रा मार्गों पर श्रद्धालुओं ने ‘जय मां नंदा’ के जयकारों के साथ डोलियों और छतोलियों की भव्य अगवानी की।
होमकुंड से लौटी बड़ी जात पहुंची फरखेत
आज मंगलवार को होमकुंड में पारंपरिक पूजा-अर्चना संपन्न करने के बाद बड़ी जात में शामिल मां नंदा देवी की डोलियां और छतोलियां गुलाड़ी एवं बादुक होते हुए फरखेत गांव पहुंचीं। इस दौरान स्थानीय ग्रामीणों और नंदा भक्तों ने यात्रा का जगह-जगह जोरदार स्वागत किया। श्री नंदादेवी बड़ी जात यात्रा समिति के अध्यक्ष कर्नल हरेंद्र सिंह रावत और कुरूड़ मंदिर समिति के अध्यक्ष सुखबीर सिंह रौतेला ने बताया कि बुधवार को यात्रा फरखेत से विदा होकर नारंगी गांव पहुंचेगी। इसके बाद यात्रा अपने मुख्य सिद्धपीठ कुरूड़ पहुंचेगी, जहां विशाल हवन-यज्ञ और विशेष पूजा-अर्चना के साथ देवी की उत्सव डोली को मंदिर के गर्भगृह में विराजमान कराया जाएगा। उन्होंने यात्रा के शांतिपूर्ण संपन्न होने पर मां भगवती के आशीर्वाद और यात्रियों के धैर्य के प्रति आभार व्यक्त किया।
बधांण की नंदा देवी का होगा भव्य मेला
दूसरी ओर, वेदनी में लोकजात संपन्न कर लौट रही बधांण की मां नंदा देवी राजराजेश्वरी की उत्सव डोली मंगलवार सुबह देवाल ब्लॉक के बेराधार गांव से विदा होकर सिरमथल व टुंड्री होते हुए गोठिंड़ा गांव पहुंची। रास्ते में श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर मां नंदा की पूजा की और मनौतियां मांगी। बुधवार को यह यात्रा गोठिंड़ा से कूनी-पार्था होते हुए रात्रि प्रवास के लिए कुराड़ गांव पहुंचेगी। श्री नंदा देवी परगना बधांण राजराजेश्वरी मंदिर समिति देवराड़ा के अध्यक्ष भुवन हटवाल और सचिव बीरेंद्र सिंह गुसाईं ने जानकारी दी कि 25 सितंबर को बधांण की नंदा देवी की डोली सिद्धपीठ देवराड़ा (थराली) पहुंचेगी। इस अवसर पर देवराड़ा में एक दिवसीय विशाल मेले का आयोजन किया जाएगा, जिसमें हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं के जुटने की संभावना है। उसी दिन देर शाम विशेष पूजा-प्रतिष्ठा के साथ डोली को मंदिर के गर्भगृह में 6 माह के लिए स्थापित कर दिया जाएगा। डोलियों के अपने-अपने मूल मंदिरों के गर्भगृह में विराजमान होने के साथ ही ऐतिहासिक श्री नंदादेवी बड़ी जात एवं लोकजात यात्रा 2026 का विधिवत समापन हो जाएगा।