October 17, 2021

अल्मोड़ा: सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय, द्वारा 8 दिवसीय “हरेला महोत्सव” का उद्घाटन कर पर्यावरण संरक्षण को लेकर विभिन्न कार्यक्रमों की शुरुवात की गयी

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सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय, अल्मोड़ा (उत्तराखंड) द्वारा 8 दिवसीय “हरेला महोत्सव” का उद्घाटन कर पर्यावरण संरक्षण को लेकर विभिन्न कार्यक्रमों की शुरुवात कर दी है। इस कार्यक्रम के उद्घाटन अवसर पर मुख्य अतिथि/संरक्षक के रूप में माननीय कुलपति प्रोफेसर नरेंद्र सिंह भंडारी, कार्यक्रम अध्यक्ष के रूप में परिसर निदेशक प्रो नीरज तिवारी, हरेला महोत्सव के संयोजक प्रोफेसर जगत सिंह बिष्ट ने शिरकत की।
दिनांक: 16 से 24 जुलाई,2021 तक सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय, परिसर अल्मोड़ा में यह महोत्सव मनाया जाएगा। उद्घाटन अवसर पर प्रो. भंडारी ने “हरेला पीठ” की भी स्थापना की। पर्यावरण संरक्षण के साथ लोकसंस्कृति को बढ़ावा दिए जाने के लिए यह पीठ विश्वविद्यालय की पहचान बनेगा।
उद्घाटन से पूर्व वन विज्ञान विभाग में इको फ्रेंडली सस्टेनेबल, कैंपस डेवलपमेंट (सतत) के तहत वन विज्ञान विभाग, NCC 77 और 24 बटालियन के कैडेट्स द्वारा भी  पौधरोपण किया गया।  पीपल और वट वृक्षों का रोपण किया गया।

गणित विभाग के सभागार में हरेला पीठ स्थापन पर गोष्ठी आयोजित की गई

इसके उपरांत गणित विभाग के सभागार में हरेला पीठ स्थापन पर गोष्ठी आयोजित की गई।  इस गोष्ठी में मुख्य अतिथि रूप में मा. कुलपति प्रो. नरेंद्र सिंह भंडारी, विशेष कार्याधिकारी डॉ देवेंद्र सिंह बिष्ट,  कार्यक्रम अध्यक्ष प्रो नीरज तिवारी (परिसर निदेशक), विशिष्ट अतिथि प्रो पुष्पा अवस्थी (कला संकायाध्यक्ष),हरेला महोत्सव के संयोजक प्रो जगत सिंह बिष्ट, प्रो जया उप्रेती (DSW), प्रो अनिल कुमार यादव (कुलानुशासक), डॉ नवीन भट्ट आदि ने दीप प्रज्ज्वलित कर और सरस्वती चित्र पर माल्यार्पण कर उद्घाटन किया।
गोष्ठी की रूपरेखा डॉ नवीन भट्ट( योग विभागाध्यक्ष) ने हरेला पीठ और हरेला महोत्सव के संबंध में विस्तार से रूपरेखा प्रस्तुत की।

हरेला पीठ पर्यावरण संरक्षण के लिए एक नई सोच, एक नई संस्कृति है

उद्घाटन सत्र के अवसर पर  मुख्य अतिथि के रूप में कुलपति प्रोफेसर नरेंद्र सिंह भंडारी ने कहा हरेला हमारी लोक संस्कृति का अंग है। यह लोक पर्व प्रकृति और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देता है। कुमाउनी लोकसंस्कृति में हरेला पर्व हमें प्रकृति से जोड़ता है।उन्होंने सभी को हरियाली की बधाई दी।
सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय के परिसर में स्थापित किये गए हरेला पीठ के संबंध में कहा कि यह हरेला पीठ पर्यावरण संरक्षण के लिए एक नई सोच, एक नई संस्कृति है। हम इस पीठ के माध्यम से पर्यावरण के विज्ञान को जनमानस तक ले जाएंगे। लोक को जानकर, परंपरागत ज्ञान को संकलित करेंगे। हरेला पीठ, अपने परिवेश को पहचानने के लिए इस विश्वविद्यालय की पहच्चान बनेगा। उनपर शोध कर समाज के समक्ष ले जाएंगे।
वेदों के संबंध में उन्होंने कहा कि हमारे वेद भी एक विज्ञान हैं। हम अपने विज्ञान को विकसित करें। हम भारतीय संस्कृति, भारतीय धरोहर को संरक्षित करें।  उन्होंने कहा कि हमारे पूर्वज जंगल संस्कृति से बाहर आये हैं। उसी का विकसित रूप आज है।  इस महामारी के दौर में हमने अपने को तैयार कर लिया है। महामारी के दौर में प्रकृति के हम काफी समीप जुड़ गए हैं। प्रकृति ने सभी को  सचेत किया है।
हम अपने गांव घरों के समीप नौलों का संरक्षण करें। उन्होंने जल देवालय के रूप में संरक्षित करें। उनके आसपास वृक्षारोपण कर विश्वविद्यालय की मुहिम को ले जाएं।
नवीन शिक्षा नीति 2020 के तहत हम समाज से जुड़ रहे हैं। अपनी जड़ों को पहचानें और हम अपनी धरोहरों को संभालें। हम नए पन के साथ अपनी परंपराओं, अपनी संस्कृति से भी जुड़े रहें। हम अपने आस-पास के क्षेत्रों से आत्मीयता बनाये रखें।

प्रोफेसर जगत सिंह बिष्ट ने कहा हरेला महोत्सव का आयोजन  उत्कृष्ट पहलों में से एक है

कार्यक्रम संयोजक प्रोफेसर जगत सिंह बिष्ट ने लोकपर्वों और संस्कृति के संरक्षण को आवश्यक बतलाया। उन्होंने कहा कि पर्यावरण के संरक्षण के लिए लोकपर्व हरेला महोत्सव का आयोजन किया जाना, इस विश्वविद्यालय के उत्कृष्ट पहलों में से एक है। इसके लिए उन्होंने कुलपति जी के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि आज पर्यावरण चिंतन किया जाना आवश्यक है। कुलानुशासक प्रो.अनिल कुमार यादव ने पर्यावरण के संरक्षण के लिए इन लोकपर्वों, गोष्ठियों, जन जागरूकता कार्यक्रमों के संचालन को आवश्यक बताया।
विशिष्ट अतिथि प्रो पुष्पा अवस्थी ने कहा कि हमें पौधौ का रोपण कर संरक्षित करने के लिए विद्यार्थियों का एक ग्रुप बनाया जाए। इससे पौधों का संरक्षण किया जाना चाहिए।

हरेला पीठ का उद्घाटन किया जाना पर्यावरण संरक्षण के लिए इस विश्वविद्यालय की उत्कृष्ट मुहिम में से एक

कार्यक्रम अध्यक्ष के रूप में प्रो. नीरज तिवारी ने कहा कि सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय,अल्मोड़ा की प्रगति और उसके द्वारा किये गए प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि टीम रूप में कार्य करने की बहुत आवश्यकता है और हमने टीम रूप में कार्य भी किया है। उन्होंने कहा कि हरेला पीठ का उद्घाटन किया जाना पर्यावरण संरक्षण के लिए इस विश्वविद्यालय की उत्कृष्ट मुहिम में से एक है। उन्होंने पौधों के रोपण के लिए छात्रों को जिम्मेदारी देने की बात कही।
इस अवसर पर  संचालन योग विभागाध्यक्ष डॉ नवीन भट्ट ने किया।

प्रतियोगिताओं का आयोजन

हरेला महोत्सव के दौरान पर्यावरण के संरक्षण और संवर्धन के लिए “पर्यावरण और हरेला पर्व” विषय से संबंधित  मीत पीपल अभियान, जनजागरूकता अभियान, पेंटिंग एवं पोस्टर प्रतियोगिता, भाषण प्रतियोगिता, निबंध प्रतियोगिता, दो दिवसीय वेबिनार, गोष्ठी भी आयोजित होगी। जिंसके लिए अलग अलग कार्यक्रम संयोजक बनाये गए हैं। निबंध प्रतियोगिता हेतु प्रोफेसर जगत सिंह बिष्ट, ड्राइंग/पोस्टर प्रतियोगिता एवं वेबिनार हेतु प्रोफेसर सोनू द्विवेदी, गोष्ठी हेतु डॉ नवीन भट्ट, भाषण प्रतियोगिता हेतु डॉ ललित जोशी, मीत पीपल जनजागरण अभियान हेतु श्री अरविंद पांडे, डॉ मनमोहन कनवाल को संयोजक बनाया गया है।

इस अवसर पर यह लोग रहे मौजूद

इस अवसर पर विश्वविद्यालय के विशेष कार्याधिकारी डॉ देवेंद्र बिष्ट,, परिसर निदेशक प्रो नीरज तिवारी, अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो जया उप्रेती, कुलानुशासक प्रो अनिल यादव,   प्रो पुष्पा अवस्थी (कला संकायाध्यक्ष),  प्रोफ अरविंद सिंह अधिकारी, प्रो शेखर जोशी, प्रो वी डी एस नेगी, प्रोफ के सी जोशी,  ( संकायाध्यक्ष, वाणिज्य),  श्री लियाकत अली ( क्रीड़ा अधिकारी) डॉ ललित चंद्र जोशी (विश्वविद्यालय मीडिया प्रभारी),  डॉ नंदन सिंह बिष्ट( निदेशक, NRDMS और समन्वयक, GIS), डॉ मुकेश सामंत, डॉ बलवंत कुमार, डॉ मनमोहन कनवाल, डॉ देवेंद्र धामी, डॉ धनी आर्या, डॉ पारुल सक्सेना, श्री लल्लन सिंह, श्री गिरीश अधिकारी, डॉ. चंद्र प्रकाश फुलोरिया, डॉ मनीष त्रिपाठी, डॉ सुभाष चंद्र,  डॉ ममता पंत ( ए एन ओ, 24 बी एन), डॉ संजीव आर्य, डॉ गिरिजा शंकर पांडे, दिनेश कुमार पटेल, हेमलता अवस्थी, जयवीर सिंह नेगी, राजेन्द्र , डॉ राजेन्द्र जोशी,निर्मल तड़ागी, कमल नेगी, दीपक उप्रेती, गौरव, विशाल, सरिता पांडे, नेहा, सीनियर अंडर अफसर दीपक कैड़ा, अक्षान हुसैन, राज तिवारी, आशीष पंत, राहुल जोशी, बृजेश बनकोटी आदि शिक्षक, कर्मचारी, छात्र-छात्राओं ने भागीदारी की।