अल्मोड़ा: अदालत का बड़ा फैसला, 14.3 लाख का चैक बाउंस, ठेकेदार को 1 साल की जेल और 16 लाख का जुर्माना

अल्मोड़ा: अल्मोड़ा में न्यायिक मजिस्ट्रेट, अल्मोड़ा (नवल सिंह बिष्ट) की अदालत ने धारा-138 परकाम्य लिखत अधिनियम के तहत दर्ज एक फौजदारी मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। परिवादी की ओर से विद्वान अधिवक्ता भगवती प्रसाद पंत ने पैरवी की।

जानें क्या है मामला

जिस पर अदालत ने चैक बाउंस के आरोपी दीवान राम आर्या पुत्र प्रताप राम भागीदार ओम कन्स्ट्रेक्शन निवासी ग्राम तल्ला शैल गूंठ, पातालदेवी अल्मोड़ा तहसील व जिला अल्मोड़ा (भागीदार, ओम कन्स्ट्रक्शन) और उनकी फर्म ओम कन्स्ट्रक्शन को दोषी करार देते हुए 1 साल के साधारण कारावास और 16 लाख रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है। इस मामले के अनुसार, छाना एन०टी०डी० अल्मोड़ा निवासी पुष्कर सिंह बोरा (स्वामी, बोरा कन्स्ट्रक्शन एण्ड सप्लाईयर इन्टरप्राइजेज) ने अपने परिचित दीवान राम आर्या को समय-समय पर ऑनलाइन (NEFT/UPI/बैंक ट्रांसफर) के माध्यम से कुल 15,20,515 रुपये उधार दिए थे। इस उधारी के एवज में अभियुक्त दीवान राम आर्या ने अपनी फर्म ‘ओम कन्स्ट्रक्शन’ के बैंक ऑफ इंडिया खाते का 14,30,000 रुपये का एक चैक (दिनांक 24.05.2024) परिवादी को जारी किया। जब परिवादी ने यह चैक भुगतान के लिए बैंक में लगाया, तो बैंक ने “Exceeds Arrangement” (व्यवस्था से अधिक) की टिप्पणी के साथ चैक को बाउंस कर दिया। कानूनी नोटिस भेजने के बावजूद रकम न चुकाए जाने पर पुष्कर सिंह बोरा ने अदालत का दरवाजा खटखटाया।


​बचाव पक्ष के तर्क हुए खारिज

​अदालत में सुनवाई के दौरान आरोपी दीवान राम आर्या ने अपना बचाव करते हुए कई तर्क रखे। अभियुक्त ने कहा कि परिवादी उनकी कार का इस्तेमाल करता था और कार में रखे उनके हस्ताक्षरित ब्लैंक चैक को चोरी कर उसका दुरुपयोग किया गया। अभियुक्त का कहना था कि फर्म के खाते की आहरण सीमा केवल 9.97 लाख रुपये थी और चैक पर उनके दूसरे भागीदार (पार्टनर) के हस्ताक्षर नहीं थे। हालाँकि, अदालत ने बचाव पक्ष के तर्कों को खारिज कर दिया। अदालत ने पाया कि चैक चोरी होने की कोई पुलिस शिकायत दर्ज नहीं कराई गई थी और न ही आरोपी अपनी उधारी व ऑनलाइन लेनदेन के आरोपों का कोई ठोस खंडन कर सके।


​अदालत का आदेश

​अदालत ने पत्रावली में उपलब्ध बैंक विवरण और साक्ष्यों का अवलोकन करते हुए माना कि परिवादी के पक्ष में विधिक रूप से देनदारी साबित होती है। न्यायिक मजिस्ट्रेट नवल सिंह बिष्ट ने अभियुक्त दीवान राम आर्या को धारा 138 NI Act के तहत दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई। जिसमें 1 वर्ष का साधारण कारावास, कुल 16,00,000 रुपये का जुर्माना, जुर्माने की राशि में से 15,95,000 रुपये परिवादी पुष्कर सिंह बोरा को क्षतिपूर्ति (मुआवजे) के रूप में दिए जाएंगे, जबकि शेष 5,000 रुपये राज्य कोष में जमा होंगे। अर्थदंड न चुकाने की स्थिति में आरोपी को 1 महीने का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा।