October 4, 2022

अल्मोड़ा: वनस्पति विज्ञान विभाग में हवन अनुष्ठान पर व्यावहारिक प्रशिक्षण का हुआ आयोजन,भविष्य में गांवों में प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित करने की बनी योजना

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वनस्पति विज्ञान विभाग, सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय परिसर अल्मोडा द्वारा ”हवन अनुष्ठान में उपयुक्त महत्वपूर्ण औषधीय वनस्पतियों एवं सूक्ष्म जीवों पर इसका प्रभाव” विषय पर एक व्यावहारिक प्रशिक्षण (हैन्ड्सआन टेªनिंग) का आयोजन हुआ। इस कार्यक्रम का शुभारम्भ मुख्य अतिथि रूप में प्रो0 अनिल कुमार यादव (समन्वयक, ग्रीन आॅडिट एवं विभागाध्यक्ष, वन एवं पर्यावरण अध्ययन विभाग) एवं डाॅ0 बलवन्त कुमार (वनस्पति विज्ञान विभागाध्यक्ष) ने द्वीप प्रज्ज्वलित कर किया।

प्रशिक्षण का उद्देश्य हिमालयी क्षेत्र की वैदिक परम्पराओं एवं वनस्पति आधारित अनुष्ठानों व चिकित्सा ज्ञान को पुर्नजीवित करना है

प्रशिक्षण कार्यक्रम की आयोजक सचिव डाॅ0 मन्जूलता उपाध्याय ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत किया एवं विभागाध्यक्ष डाॅ0 बलवंत कुमार द्वारा कार्यक्रम की विस्तृत रूपरेखा पर प्रकाश डालते हुए बताया कि इस प्रशिक्षण का उद्देश्य हिमालयी क्षेत्र की वैदिक परम्पराओं एवं वनस्पति आधारित अनुष्ठानों व चिकित्सा ज्ञान को पुर्नजीवित करना है ताकि वर्तमान समय में कोविड जैसी भयंकर बीमारियों एवं महामारियों से निजात मिल सके। इसके साथ लोग पौराणिक काल में हमारे ऋषियों द्वारा उनके तप और साधना से जनित ज्ञान का आज भी लाभ उठाकर स्वयं व पर्यावरण को स्वस्थ रख सकें।  मुख्य अतिथि के रूप में प्रो0 अनिल कुमार यादव ने वनस्पति विज्ञान विभाग के कार्यों की सराहना की तथा बताया कि परिसर को स्वच्छ व सुन्दर बनाने के लिए हर सम्भव प्रयास किया जा रहा है।

हमें अपने परंपरागत ज्ञान को प्रकाश में लाने की आवश्यकता है

हवन अनुष्ठान का महत्व बताते हुए उन्होंने कहा कि आज हमें अपने परंपरागत ज्ञान को प्रकाश में लाने की आवश्यकता है। उसमें विज्ञान छुपा हुआ है। हमें परंपरागत ज्ञान को सामने लाकर उसे वैज्ञानिकता की कसौटी पर परखकर उपयोग में लाने की पहल करनी होगी। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय में हरेला पीठ इन सभी सांस्कृतिक, धार्मिक एवं पर्यावरणीय कार्यों के संवर्धन एवं संरक्षण के लिए लगातार कार्य कर रहा है ।

अपने घर में खाने-पीने की वस्तुओं एवं वातावरण में मौजूद घातक सूक्ष्य जीवों को समाप्त कर स्वस्थ रख सकते हैं, इस पर विस्तार से जानकारी दी

         तीन सत्रों में आयोजित हुए इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के पहले सत्र में प्री हवन अर्थात हवन के वैज्ञानिक तथ्यों को जानने के लिए डाॅ0 मंजूलता उपाध्याय द्वारा प्रस्तुतिकरण दिया गया। प्रस्तुतिकरण के माध्यम से शोधार्थियों एवं प्रतिभागियों को विभिन्न प्रकार के कल्चर मीडियम तैयार कर, सभी उपकरणों को स्टरलाइज (जर्ममुक्त) करने की विधि को बताया गया, साथ ही विभिन्न प्रकार के सूक्ष्म जीव वैक्टीरिया, वायरस को हम हवन के सुगन्धित धुवें से किस प्रकार से अपने घर में खाने-पीने की वस्तुओं एवं वातावरण में मौजूद घातक सूक्ष्य जीवों को समाप्त कर स्वस्थ रख सकते हैं, इस पर विस्तार से जानकारी दी।
दूसरे सत्र में सभी प्रतिभागियों, मुख्य अतिथि एवं आयोजक समिति द्वारा हवन का आयोजन किया गया। हवन में सुगन्धित हवन सामग्री, घी, देवदार व आम की संविधा (लकडी), गोला, जौ, तिल, बतासा आदि की आहुति डालकर हवन की राख तैयार की गयी। उसके उपरांत पोस्ट हवन (तृतीय सत्र) प्रारम्भ हुआ।

ये सभी पौंधे विभिन्न रोगों से हमें मुक्त करते हैं

  इस सत्र में विभागाध्यक्ष व कार्यक्रम संयोजक डाॅ0 बलवन्त कुमार द्वारा हवन एवं हवन में प्रयुक्त होने वाली औषधीय एवं सुगन्धित वनस्पतियों पर प्रतिभागियों का ध्यान केन्द्रित किया।  उन्होंने बताया कि ये सभी पौंधे विभिन्न रोगों से हमें मुक्त करते हैं। विदेशों में इस हवन प्रथा को अरोमा थरैपी के नाम से रोगों का उपचार किया जा रहा है। हमें गर्व है कि यह परम्परा हमारे ऋषियों ने विकसित की थी और हम इसे आने वाली पीढी को अवश्य बतायें ताकि न्यूनतम लागत की इस विधा से हमें सदैव स्वयं व पर्यावरण को स्वस्थ रख सकें। हवन की राख को मिट्टी में मिलाकर तीन मौसमी फसलों का अंकुरण प्रतिशत एवं उनमें रूपात्मक परिवर्तन जानने के उद्देश्य से विभाग में स्थित वानस्पतिक उद्यान में प्रयोग लगाया गया। इस प्रयोग का अनुश्रवण आंकडों का संकलन आदि का कार्य शोधार्थियों द्वारा किया जायेगा। ज्ञातव्य है कि विभाग द्वारा हाल ही में इस विषय पर एक राष्ट्रीय सेमिनार आयोजित किया था।

प्रमाण पत्र वितरित किये गये

    समापन अवसर पर सभी प्रतिभागियांे को प्रमाण पत्र वितरित किये गये ।  समापन करते हुए वनस्पति विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष डाॅ0 बलवंत कुमार ने बताया कि आगामी दिनों में भी ऐसा प्रशिक्षण कार्यक्रम छात्र-छात्राओं एवं समाज के हर वर्ग के लिए भी आयोजित किये जाएंगे। भविष्य में ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम आस-पास के गांवों में रखे जाएंगे।

ये रहे मौजूद

इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में डाॅ0 धनी आर्या, डाॅ0 सुभाष चन्द्र, डाॅ0 मनीष त्रिपाठी, डाॅ0 रवीन्द्र कुमार, डाॅ0 ललित जोशी (विश्वविद्यालय मीडिया प्रभारी), श्री प्रमोद भट्ट, नन्दाबल्लभ सनवाल, श्री रमेश चन्द्र, श्री सुनील कुमार, श्री पप्पू बालमीकि, मुक्ता मर्तोलिया, पूजा नेगी, भावना पाण्डेय, पंकजा पाण्डेय, दीप चन्द्र तिवारी सहित लगभग 100 प्रतिभागी उपस्थित रहे।