अल्मोड़ा: भारतीय सेना में देश सेवा के बाद गांव लौटे एक पूर्व सैनिक आज पर्वतीय क्षेत्रों के किसानों के लिए प्रेरणा बने हैं। हम बात कर रहे हैं रानीखेत के समीपवर्ती कनेली गांव (हवालबाग ब्लॉक) निवासी पूर्व सैनिक मनोज चंद्र उपाध्याय की।
कृषि का संकल्प
जानकारी के अनुसार वर्ष 2020 में सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद मनोज ने शहर में बसने के बजाय अपने गांव में रहकर आधुनिक कृषि करने का संकल्प लिया। अपनी मेहनत और नवाचार के दम पर उन्होंने लगभग 25 नाली (एक एकड़ से अधिक) भूमि में समेकित खेती का एक शानदार मॉडल विकसित किया है। पहाड़ी क्षेत्रों में सिंचाई की समस्या को देखते हुए उन्होंने वर्षा जल संग्रहण के लिए 20,000 लीटर की क्षमता वाले दो टैंक बनाए। सूखे के दौरान सिंचाई के लिए इस पानी का उपयोग किया जाता है। इसके साथ ही उन्होंने टपक सिंचाई प्रणाली अपनाई, जिससे फसलों को आवश्यक नमी भी मिलती रहती है और पानी की बर्बादी भी नहीं होती।
उगा रहें यह सब्जियां
मनोज उपाध्याय अपने खेत में मौसमी सब्जियों के अलावा कई तरह की विशेष फसलें उगा रहे हैं। इसमें बांज, बुरांश और काफल जैसी चौड़ी पत्ती वाली प्रजातियाँ, रोजमैरी, तुलसी, गिलोय और बिच्छूघास, रबी सीजन में वे औषधीय गुणों से भरपूर काला गेहूं भी उगा रहे हैं। उद्यान विभाग के ‘मिशन कीवी’ के तहत उन्होंने 5 नाली क्षेत्र में कीवी के 32 उन्नत पौधे लगाए हैं, जिनमें अगले वर्ष तक फल आने की संभावना है।
किया सम्मानित
समेकित कृषि और जल संरक्षण के इस सफल प्रयोग के लिए अखिल भारतीय किसान मेला (पंतनगर) में उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (से.नि.) गुरमीत सिंह और कृषि व उद्यान मंत्री गणेश जोशी ने मनोज चंद्र उपाध्याय को ‘प्रगतिशील कृषक सम्मान’ से सम्मानित किया है।