October 2, 2022

अल्मोड़ा: एसएसजे विश्वविद्यालय, और संस्कार भारती, उत्तराखंड के संयुक्त तत्वावधान में तीन दिवसीय ऑन द स्पॉट चित्र निर्माण कार्यशाला एवं प्रतियोगिता का हुआ शुभारंभ

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आजादी के अमृत महोत्सव-2021 के तहत दृश्यकला संकाय एवं चित्रकला विभाग, सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय, अल्मोड़ा और संस्कार भारती, उत्तराखंड के संयुक्त तत्वावधान में दृश्यकला संकाय के सभागार में तीन दिवसीय ऑन द स्पॉट चित्र निर्माण कार्यशाला एवं प्रतियोगिता का शुभारंभ हुआ ।स्वाधीनता के 75 वर्षों में ललित कलाओं की भूमिका‘ विषय पर कार्यशाला और प्रतियोगिता का उद्घाटन अवसर पर मुख्य संरक्षक रूप में प्रो0 एन0 एस0 भंडारी (माननीय कुलपति, सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय), विशिष्ट अतिथि रूप में श्री देवेंद्र सिंह रावत (क्षेत्र प्रमुख संस्कार भारती पश्चिमी उत्तर प्रदेश-उत्तरखंड), प्रो0 शेखर चंद्र जोशी (अधिष्ठाता शैक्षिक), अध्यक्ष रूप में प्रो0 प्रवीण बिष्ट (अधिष्ठाता प्रशासन), कार्यक्रम संयोजक प्रो0 सोनू द्विवेदी ‘शिवानी‘ (संकायाध्यक्ष, दृश्यकला एवं विभागाध्यक्ष, चित्रकला) ने अपना उद्बोधन दिया।
दृश्यकला संकाय के विद्यार्थियों ने दीप प्रज्जवलित कर ‘जय मां जै जै मां, वर दे वर दे वीणा-वादिनी वर दे‘ वंदना गीत का गायन किया। इस अवसर पर अतिथियों को पुष्प गुच्छ देकर सम्मानित किया गया।

भारत की संस्कृति और उसकी मौलिकता के बारे में जानकारी दी

मुख्य संरक्षक रूप में अपने उद्बोधन में कुलपति प्रो0 नरेंद्र सिंह भंडारी ने भारत की संस्कृति और उसकी मौलिकता के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि विचारों का सर्जन बौद्धिक मस्तिष्क में होना चाहिए। कलाकार को नवीन सर्जना करनी आवश्यक हो जाती है, क्योंकि वह समाज को अपनी आंखों से देखता है। समाज की बुराईयों, समस्याओं को वह देखता है। उन्होंने नवीन शिक्षा नीति के संबंध में कहा कि आज तकनीकी अवदान के फलस्वरूप कला क्षेत्र में नवीन सर्जन हो रहा है। तकनीक का कला क्षेत्र में प्रभाव पड़ रहा है। हमें कला के साथ-साथ देशज शिक्षा पद्धति को बढ़ावा देना होगा। देशज शिक्षा के पीछे भाव यह है कि हमें अपने देश की शिक्षा पद्धति को बढ़ावा देना है। हम रोजगारपरक शिक्षा को बढ़ावा दें। उन्होंने विद्याथियों का आह्वान करते हुए कहा कि वह नवीन विचारों को जानें, समझें और संस्कारों को विकसित करें।

यह कार्यशाला का होना बहुत सराहनीय है

अधिष्ठाता शैक्षिक प्रो0 शेखर जोशी ने सभी अतिथियों, शिक्षकों, छात्रों, कलाकारों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय के दृश्यकला संकाय एवं संस्कार भारती, उत्तराखंड के सहयोग से यह कार्यशाला का होना बहुत सराहनीय है। उन्होंने कहा कि शहीदों के बलिदान के फलस्वरूप हम आज स्वतंत्र जीवन जी पा रहे हैं। हमें उनके बलिदान को कला के माध्यम से जीवित रख उन्हें सदैव याद रखना होगा।  
कार्यक्रम संयोजक प्रो0 सोनू द्विवेदी ‘शिवानी‘ (संकायाध्यक्ष, दृश्यकला एवं विभागाध्यक्ष, चित्रकला) ने कहा कि इस कार्यशाला में विभिन्न स्थानों से कलाकार जुड़े हैं।  उन्होंने रूपरेखा रखते हुए कहा कि कलाकारों में राष्ट्रपेम की भावना जागृत करना एवं प्रदेश तथा देश के स्वाधीनता आंदोलन में स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के कार्यों को चित्रित करना, इस कार्यशाला का उद्देश्य रहा है। उन्होंने संस्कार भारती के सभी सदस्यों का आभार जताया।

राजा राम के आदर्शों को अपनाने की बात कही

विशिष्ट अतिथि रूप में श्री देवेंद्र सिंह रावत ने समाज को राजा राम के आदर्शों को अपनाने की बात कही। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि वह एकाग्रता के साथ पढें, सुनें एवं देखें और अपनी क्षमताओं को विकसित करें। कला के संबंध में कहा कि चित्र बोलते हैं। युवा कलाकार, कला साधना करें और समाज को दृष्टि दें। उन्होंने देश भक्ति से ओतप्रोत रचनाओं एवं शहीदों को भी स्मरण किया।

कला की शैलियों के बारे में जानकारी दी

संस्कार भारती के श्री पंकज अग्रवाल ने संस्कार भारती की ओर से दृश्यकला संकाय की संयोजक एवं सभी सदस्यों, विद्यार्थियों के प्रयासों की सराहना करते हुए बधाईयां दीं।
संस्कार भारती के प्रांतीय संयोजक एवं चित्रकार डॉ0 गिरीश चंद्र शर्मा ने दृश्यकला संकाय के छात्रों को कला की शैलियों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि कलाकार संवेदनशील होना चाहिए और कलाकार मौलिकता को कभी न भूले। कला हमें पशुवत आचरण से दूर ले जाती है। स्कूल-कॉलेजों में कला को बढ़ावा देने के प्रयास किए जाने चाहिए।
अध्यक्षीय उद्बोधन में परिसर के अधिष्ठाता प्रशासन प्रो0 प्रवीण सिंह बिष्ट ने कला को रोजगार की दृष्टि से अपनाए जाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि युवा कलाकार आज के हिसाब से कला सर्जना करें। कलाकार अपनी कला को व्यावसायिक रूप देकर अपनी आर्थिकी को मजबूत कर सकते हैं। उन्होंने दृश्यकला संकाय और संस्कार भारती के सम्मिलित प्रयासों को सराहा और कहा कि हमारे लिए कला बहुत आवश्यक है।
कार्यक्रम का संचालन चित्रकला विभाग के वरि0 प्राध्यापक डॉ0 संजीव आर्या ने किया।

यह लोग रहे मौजूद

इस अवसर पर विश्वविद्यालय के विशेष कार्याधिकारी डॉ0 देवेंद्र सिंह बिष्ट, विश्वविद्यालय मीडिया प्रभारी डॉ0 ललित चंद्र जोशी ‘योगी‘, डॉ0 सागर भैसोड़ा, कार्यक्रम सह संयोजक मंडल के श्री कौशल कुमार, श्री चंदन आर्या, श्री संतोष सिंह मेर, श्री रमेश मौर्य, तकनीकी सहयोग में श्री संतोष सिंह मेर, कार्यालय सहयोगी श्री पूरन सिंह, श्री रविशंकर गुसाईं, श्री विनीत बिष्ट, श्री जीवन चंद्र जोशी, श्री योगेश डसीला, श्री धीरज भट्ट, कु0 कंचन कृष्णा, श्री नाजिम अली, श्री पंकज कुमार जायसवाल, श्री नवीन चंद्र, कु0 सुनीता, श्री हिमांशु आर्या ने अपना सहयोग प्रदान किया। इस कार्यशाला में विभाग के शिक्षक एवं छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।