देवभूमि में न जाने क्यों? नहीं बच पा रही हैं बेटियां-डॉ ललित योगी
हवसी,दरिंदों के बीचबेवस हो रही हैं बेटियां।आज फिर, जाने क्यों?जल रही हैं बेटियां। इन रसूखदारों को कोईसबक सिखाओ तो सही।इन मायावियों के जाल मेंआज फंस रही है बेटियां।। बाहर ज्ञानशालाएं सी लगे,भीतर कालिख के हैं निशान।बड़े ही राज उगल गयी हैं येइन राजमंत्रियों की कोठियां। अब न लूटे अस्मत किसी…