चंपावत: जनहित याचिका (PIL) के माध्यम से लड़ी गई एक लंबी कानूनी लड़ाई के बाद कफड़ा क्षेत्र के हजारों विद्यार्थियों और उनके परिवारों के लिए राहत भरी खबर आई है।
मिली मंजूरी
यहां क्षेत्र में लंबे समय से लंबित स्कूल के उच्चीकरण (अपग्रेडेशन) की मांग को आखिरकार शासन की मंजूरी मिल गई है। राज्य सरकार द्वारा जारी शासनादेश (GO) के बाद अब स्थानीय बच्चों को उच्च शिक्षा के लिए दूर-दराज के इलाकों में नहीं जाना पड़ेगा। यह मामला याचिकाकर्ता रंजीत सिंह बोरा द्वारा उत्तराखंड उच्च न्यायालय में याचिका दायर (WPPIL/41/2026: रंजीत सिंह बोरा बनाम सचिव, विद्यालयी शिक्षा विभाग एवं अन्य) करने के बाद सुर्खियों में आया था। याचिका में यह तर्क दिया गया था कि स्कूल द्वारा उच्चीकरण के सभी तय मानक और आवश्यक योग्यताएं पूरी करने के बावजूद शासन स्तर पर इसे मंजूरी क्यों नहीं दी जा रही है।
अदालत में जवाब दाखिल करने से पहले ही जारी हुआ शासनादेश
मामले की गंभीरता को देखते हुए उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार से लिखित उत्तर प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था। अदालत में जवाब दाखिल करने की प्रक्रिया के बीच ही शासन ने तत्परता दिखाते हुए विद्यालय के उच्चीकरण का औपचारिक आदेश जारी कर दिया। शासनादेश जारी होने से अब स्कूल परिसर के विस्तार, नई कक्षाओं और आवश्यक संसाधनों के निर्माण का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है।
‘यह पूरे क्षेत्र के भविष्य की जीत’: रंजीत सिंह बोरा
फैसले पर खुशी जताते हुए याचिकाकर्ता रंजीत सिंह बोरा ने कहा, “यह सफलता केवल किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि उन हजारों बच्चों और अभिभावकों के संघर्ष की जीत है जो वर्षों से इसकी राह देख रहे थे। ग्रामीण क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का उपलब्ध होना सीधे तौर पर बच्चों के भविष्य और परिवार की आर्थिक स्थिति से जुड़ा होता है।” उन्होंने कहा कि इस फैसले से आसपास के दर्जनों गांवों के बच्चों को सीधा लाभ मिलेगा। विशेष रूप से उन विद्यार्थियों को राहत मिलेगी जिन्हें रोज लंबी दूरी तय करके पढ़ने जाना पड़ता था या मजबूरी में घर से दूर रहकर पढ़ाई करनी पड़ती थी।
कानूनी टीम का जताया आभार
याचिकाकर्ता ने अदालत में बच्चों के शैक्षिक अधिकारों की बात मजबूती से रखने के लिए अपनी कानूनी टीम—अधिवक्ता प्रभाकर जोशी, अधिवक्ता विनोद चन्द्र तिवारी और अधिवक्ता भूपेश सिंह बिष्ट का विशेष आभार जताया। उन्होंने कहा कि यह मामला इस बात का सटीक उदाहरण है कि संवैधानिक और कानूनी माध्यमों से जनता की मूलभूत समस्याओं का समाधान पाया जा सकता है।