देश दुनिया की खबरों से हम आपको रूबरू कराते रहते हैं। एक ऐसी खबर हम आपके सामने लाए हैं। मथुरा के वृंदावन में प्रेमानंद महाराज का जन्मोत्सव मनाया जाएगा।
आयोजित होंगे कार्यक्रम
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यह जन्मोत्सव 25 से 30 मार्च तक मनाया जाएगा। जिसमे बड़ी संख्या भक्त उनके दर्शन को पहुंचेंगे। प्रेमानंद महाराज की दिनचर्या में भी परिवर्तन होगा। इस संबंध में जानकारी महाराज के सोशल मीडिया अकाउंट पर दी गई है। जन्मोत्सव में कई कार्यक्रम भी आयोजित होंगे, जहां भक्तों को महाराज के दर्शन प्राप्त होंगे।
जन्मोत्सव का कार्यक्रम
| समय | प्रातःकालीन सत्र |
| 03 बजे से 4:15 बजे तक | नाम संकीर्तन |
| 04:15 बजे से 05:30 तक | सत्संग |
| 05:40 बजे से 07:30 तक | पूज्य महाराज जी के दर्शन |
| 05:30 बजे से 06:30 तक | मंगल आरती, श्रीजी का झूला दर्शन, नाम संकीर्तन |
| 06:30 बजे से 08:30 तक | श्रीहित चतुरासी जी पाठ |
| 08:30 बजे से 09:15 तक | श्रृंगार आरती, राधा नाम कीर्तन |
| 09:15 बजे से 10:30 तक | नाम संकीर्तन |
| समय | सायंकालीन सत्र |
| 04:00 बजे से 06 बजे तक | संध्या वाणी पाठ |
यह रहेगा कार्यक्रम
| 25 मार्च 2025 | वृन्दावन, गोवर्धन, बरसाना, मथुरा, बृज क्षेत्र आगरा और अलीगढ़ के शिष्य |
| 26 मार्च 2025 | उत्तर प्रदेश के शिष्य परिकर (समस्त ब्रज क्षेत्र, आगरा व अलीगढ़ के अलावा) |
| 27 मार्च 2025 | दिल्ली, नोएडा, गुरुग्राम व पंजाब के शिष्य परिकर |
| 28 मार्च 2025 | NRI, हरियाणा, केरल, उत्तराखंड, आसाम, आंध्र प्रदेश, गोवा, कर्नाटक, तमिलनाडु, तेलांगना, हिमाचल प्रदेश, बिहार और गुजरात के शिष्य परिकर |
| 29 मार्च 2025 | महाराष्ट्र, उत्तीसगढ़, झारखण्ड, वेस्ट बंगाल, उड़ीसा, मध्य प्रदेश, जम्मू और कश्मीर व राजस्थान के शिष्य परिकर |
| 30 मार्च 2025 | विरक्त परिकरविरक्त परिकर |
उत्तरप्रदेश में हुआ जन्म
प्रेमानंद महाराज का असली नाम अनिरुद्ध पांडे है। उनका जन्म उत्तर प्रदेश के कानपुर में एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था। उन्होंने 13 वर्ष की आयु में ही अपना घर त्याग दिया था। उन्होंने अपना जीवन राधा रानी की भक्ति सेवा के लिए समर्पित कर दिया। प्रेमानंद जी महाराज, वृंदावन के प्रसिद्ध संत हैं। वे राधा रानी के परम भक्त हैं। उनके भजन-कीर्तन और सत्संग में दूर-दूर से लोग आते हैं। प्रेमानंद जी महाराज की प्रसिद्धि देश-विदेश में है। वे भजन-कीर्तन करते हैं और भजन मार्ग व कथा के ज़रिए मोक्ष प्राप्ति का ज्ञान देते है। साथ ही सोशल मीडिया ने उन्हें बच्चे बड़ों और बूढ़ों सबके बीच में काफी ज्यादा लोकप्रिय कर दिया है। वे राधा रानी और भगवान श्री कृष्ण की भक्ति में ऐसा रम गए की आज वह वृंदावन के सबसे बड़े सन्यासी के रूप में जाने जाते हैं।