October 22, 2021

उत्तराखंड: सभी कार्मिकों को अपने अधिकारों के लिए एकजुट होकर आना होगा आगे- धीरेन्द्र कुमार पाठक

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सरकार द्वारा कोविड के नाम पर कार्मिकों के धरना प्रदर्शन कार्यक्रम व हड़ताल व अनशन आदि पर रोक लगाने पर पदोन्नति पर असर-

वर्तमान में सरकार द्वारा कोविड के नाम पर कार्मिकों के धरना प्रदर्शन कार्यक्रम व हड़ताल व अनशन आदि पर रोक लगाई गई है जिससे सभी विभागों के पदोन्नति पर भी असर पड़ रहा है और भर्ती वर्ष के 20 दिन बचे हुए हैं सभी जगहों से पदोन्नति नहीं होने की शिकायतें दी जा रही है। सरकार व शासन को भेजें जाने वाले पत्रों को भी गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है ।

सभी को एकजुट होकर आना होगा आगे-

सरकार व विपक्षी दलों द्वारा आम चुनाव की तैयारी की जा रही है और हर जगह इस पर रायशुमारी हो रही है और कार्मिकों को उनके सेवा के प्रतिफल पदोन्नति से भी कोरोना के नाम पर बाधित किया जा रहा है । जिसके लिए सभी को एकजुट होकर मुख्यमंत्री से मिलकर बात रखनी चाहिए और पदोन्नति न होने की स्थिति में आंदोलन का नोटिस जारी करना चाहिए जब सभी उत्तराखंड के कार्मिक द्वारा आंदोलन किया जायेगा, तो सरकार किस किस पर कार्यवाही करेगी।

सरकार के दोहरे रवैए से पदोन्नति हो रही बाधित-

सरकार के दोहरे रवैए से पदोन्नति बाधित हो रही है अधिकारियों द्वारा कोरोना काल का बहाना बनाया जा रहा है और पदोन्नति संशोधन व पदोन्नति प्रक्रिया को रोका गया है। पूरे प्रदेश में लगभग सभी विभागों में 2000-3000 हजार पदोन्नति अनुमानित है संख्या  घट बढ़ सकती हैं  ऐसी स्थिति में सभी पदाधिकारियों की शीर्ष स्तर पर चुप्पी आश्चर्यजनक है । संगठन के उच्च मापदंडों को देखते हुए आगे बढ़ना चाहिए और जरूरत हो तो सभी पदाधिकारियों को एक बैनर के नीचे आकर संघर्ष के लिए एकजुट होना चाहिए।

मिशन के तौर पर लेना होगा-

जिस तरह 11 महीने निकल गये यह भर्ती वर्ष का महत्वपूर्ण महीना भी निकल जायेगा फिर सोचने से कुछ नहीं होगा । उत्तराखंड में लगातार सभी बिंदु पर सरकार का रवैया उपेक्षात्मक रहा है गोल्डन कार्ड, स्थानांतरण  सत्र को शून्य घोषित करना, डी ए पर लगातार रोक  पुरानी पेंशन को बहाल नहीं करना शिथिलीकरण बहाल न करना संशोधित ए सी पी आदि मामलों में कार्यवाही नहीं करना सरकार के गलत रवैए को दर्शाता है । ग़लत को ग़लत कहना सीखना होगा तभी संगठनों का भी महत्व है, लोकतंत्र विरोध की इजाजत देता है । केवल 20 दिनों में चार  चार स्तरों की पदोन्नति को बाहर निकालने को मिशन के तौर पर लेना होगा । जिसमें हमें एकजुटता दिखानी होगी।

शासनादेश के लिए भी मांग रखने की है आवश्यकता-

सरकार से ऐसे शासनादेश के लिए भी मांग रखने की आवश्यकता है जिसमें समयबद्ध पदोन्नति नहीं होने पर संबंधित पदोन्नत करने वाले अधिकारी को निलंबित कर दिया जाना चाहिए। अपने अधिकारों के लिए संघर्षरत रहना हमारा नैतिक जिम्मेदारी व दायित्व है ।