उत्तराखंड: उत्तराखंड में मानसून की दस्तक से पहले राज्य सरकार प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए अलर्ट मोड पर आ गई है।
दिए यह निर्देश
इसी क्रम में राज्य की संवेदनशील भौगोलिक स्थिति को देखते हुए इस बार टेक्नोलॉजी बेस्ड वर्किंग सिस्टम और जोखिम आकलन पर विशेष जोर दिया जा रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक जिस पर मुख्य सचिव आनंद बर्धन एक बैठक में भूकंप पूर्व चेतावनी प्रणाली (EEWS) और हिमनदी झील विस्फोट बाढ़ (GLOF) जैसे खतरों से निपटने की तैयारियों की समीक्षा की। जिसमें उन्होंने वाडिया संस्थान को निर्देश दिया है कि वे वर्ष 2026-28 की अवधि के लिए एक विस्तृत और समयबद्ध कार्ययोजना प्रस्तुत करें। इस योजना में केवल निगरानी ही नहीं, बल्कि झीलों से नियंत्रित जल निकासी और जलस्तर कम करने जैसे संरचनात्मक उपाय भी शामिल होने चाहिए।
भूकंप चेतावनी प्रणाली का विस्तार
राज्य अपने भूकंपीय नेटवर्क को भी और अधिक प्रभावी बनाने जा रहा है। वर्तमान में राज्य में 169 सेंसर और 112 सायरन सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं। भविष्य में सरकार की योजना 500 नए ‘तीव्र कंपन’ सेंसर और 526 अतिरिक्त चेतावनी सायरन लगाने की है।आईआईटी रुड़की के साथ मिलकर इस पूरे सिस्टम के रखरखाव और नई वेधशालाओं की स्थापना पर काम किया जा रहा है। प्रशासन ने मानसून के दौरान संभावित खतरों को देखते हुए चमोली, उत्तरकाशी और पिथौरागढ़ में 48 अति-संवेदनशील स्थलों की पहचान की है।