उत्तराखंड: उत्तराखंड सरकार ने पर्वतीय व मैदानी क्षेत्रों में कृषि उत्पादन को बढ़ावा देने और किसानों को उनकी उपज का स्थानीय स्तर पर ही उचित मूल्य दिलाने के लिए ‘एक मंडी-एक गांव’ योजना शुरू की है।
यह खास पहल
इसके तहत राज्य की सभी 23 कृषि उत्पादन मंडी समितियां तीन साल के लिए एक-एक गांव को गोद लेंगी और उसे ‘मॉडल कृषि विपणन ग्राम’ के रूप में विकसित करेंगी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक योजना के तहत गोद लिए गए गांवों को एक वर्ष के लिए विशेष विकास पैकेज दिया जाएगा। वर्तमान में रुद्रपुर, ऋषिकेश, मंगलौर, हरिद्वार, टनकपुर, हल्द्वानी, रामनगर, देहरादून, लक्सर, काशीपुर और रुड़की की मंडी समितियां एक-एक गांव का चयन कर चुकी हैं, जबकि शेष समितियों में चयन प्रक्रिया जारी है। गांवो के चयन में इन्हें प्राथमिकता मिलेगी।
• कृषि प्रधान, जैविक खेती और बेहतर फल-सब्जी उत्पादन वाले क्षेत्र।
• किसान उत्पादक संगठन (FPO), स्वयं सहायता समूह (SHG) और सहकारी समितियों से जुड़े सक्रिय गांव।
• दुर्गम व पर्वतीय क्षेत्रों के दूरस्थ गांव।
गांवों में विकसित होंगी ये आधुनिक सुविधाएं
• आधारभूत ढांचा: मिनी कलेक्शन सेंटर, ग्रामीण हाट (मिनी मंडी), इलेक्ट्रॉनिक कांटा, कोल्ड स्टोरेज/कोल्ड रूम और गोदाम का निर्माण।
• प्रसंस्करण व ग्रेडिंग: ग्रेडिंग व पैकेजिंग यूनिट, मिलेट-मसाला, शहद, औषधीय और फल प्रसंस्करण इकाइयां।
• किसान सहायता: सब्सिडी पर पॉलीहाउस, जैविक खाद इकाइयां, उन्नत बीज वितरण और परिवहन सहायता।
• डिजिटल लिंकेज: उत्पादों की बेहतर ब्रांडिंग, पैकेजिंग, क्षमता निर्माण और डिजिटल व डायरेक्ट मार्केट लिंकेज।