उत्तराखंड: विश्व धरोहर ‘रम्माण’:  इतने अप्रैल को सजेगा सलूड़-डुंग्रा में मुखौटा नृत्य का अनूठा मंच, घोषित हुई तिथि

ज्योतिर्मठ (चमोली): यूनेस्को की विश्व सांस्कृतिक धरोहर सूची में शामिल सीमांत पैनखंडा क्षेत्र के पौराणिक उत्सव ‘रम्माण’ का भव्य आयोजन इसी माह किया जाएगा।

26 अप्रैल की तिथि घोषित

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस मुख्य समारोह की तिथि घोषित कर दी गई है। जिसमें बैसाखी के पावन पर्व पर सलूड़-डुंग्रा गांव में आयोजित महापंचायत में पंचांग गणना के बाद घोषित की गई। इसके लिए 26 अप्रैल का शुभ मुहूर्त तय किया गया है। जिसमें अगले 12 दिनों तक विभिन्न मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना और क्षेत्र भ्रमण के कार्यक्रम होंगे। रात्रिकालीन सत्रों में विशेष मुखौटा नृत्यों का आयोजन किया जाएगा, जो रम्माण का मुख्य आकर्षण हैं। वहीं इस वर्ष के मुख्य समारोह में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज, विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खण्डूरी भूषण और महेन्द्र भट्ट समेत कई गणमान्य व्यक्तियों को आमंत्रित किया गया है।

आदि शंकराचार्य के काल से जुड़ी है यह खास परंपरा

​रम्माण के संयोजक डॉ. कुशल भण्डारी ने बताया कि यह धार्मिक अनुष्ठान हजारों वर्षों से क्षेत्रीय आस्था का केंद्र रहा है। ऐतिहासिक मान्यताओं के अनुसार, 8वीं सदी में जब आदि गुरु शंकराचार्य ज्योतिर्मठ आए थे, तब इस परंपरा को और अधिक विस्तार मिला। यह उत्सव न केवल एक आयोजन है, बल्कि प्राचीन पहाड़ी संस्कृति और देव उपासना का जीवंत प्रमाण है।