देश दुनिया की खबरों से हम आपको रूबरू कराते रहते हैं। एक ऐसी खबर हम आपके सामने लाए हैं। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपनी मर्जी से शादी करने वाले बालिग जोड़ों के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने और उन्हें परेशान करने की बढ़ती प्रवृत्ति पर सख्त नाराजगी जताई है।
अदालत का आदेश
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक जिस पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इसे ‘एक परेशान करने वाला चलन’ करार दिया है और कहा कि पुलिस को अन्य अपराधों की जांच करने के बजाय प्रेम विवाह करने वाले युवाओं का पीछा करने में अपनी ऊर्जा बर्बाद नहीं करनी चाहिए। जिस पर न्यायमूर्ति जेजे मुनीर और न्यायमूर्ति तरुण सक्सेना की पीठ ने एक युवा जोड़े द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह सख्त टिप्पणी की। साथ ही अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी भी बालिग व्यक्ति को यह बताने का अधिकार किसी के पास नहीं है कि वह किसके साथ रहेगा, किससे शादी करेगा या अपनी जिंदगी कैसे बिताएगा। कहा अपनी मर्जी से साथ रहने वाले जोड़े पर कार्रवाई करना उनकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर गंभीर हमला है। मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (DGP) को निर्देश दिया है कि वे इस तरह के मामलों में तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करें।
जानें मामला
रिपोर्ट्स के मुताबिक यह मामला एक बालिग जोड़े का था, जिसमें लड़की ने अपनी मर्जी से लड़के से शादी की थी। हालांकि, लड़की के पिता ने उसे ‘लापता’ बताते हुए शिकायत दर्ज कराई थी, जिस पर पुलिस ने तुरंत भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 87 के तहत लड़के के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली और जोड़े का पीछा करना शुरू कर दिया।